गाजीपुर में हेड कांस्टेबल की हत्या के मुख्य आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर
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कोर्ट ने अर्जुन को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अर्जुन के समर्पण की पुलिस को भनक तक नहीं लगी। अर्जुन की गिरफ्तारी के लिए गाजीपुर के साथ ही वाराणसी रेंज के तीन अन्य जिलों की पुलिस भी सूचना संकलन और छापेमारी में लगी हुई थी।
29 दिसंबर को गाजीपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा आयोजित थी। पीएम मोदी की सभा के कारण आरक्षण को लेकर धरना-प्रदर्शन की अनुमति न मिलने और एक नेता को हिरासत में लिए जाने पर निषाद पार्टी के लोग कठवा मोड़ पुल के समीप जाम लगाकर धरना दे रहे थे।
सभा के बाद वापसी के दौरान जाम में करीमुद्दीनपुर थाने के एसओ का वाहन फंस गया था। पुलिसकर्मी जाम हटाने लगे तो उन पर पथराव शुरू कर दिया गया। पथराव में हेड कांस्टेबल सुरेश वत्स गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाए जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।
प्रकरण को लेकर अर्जुन सहित 32 नामजद और 150 से ज्यादा अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। सोमवार को अर्जुन ऊनी टोपी लगाकर और मफलर से चेहरा ढंक कर एसीजेएम (पूर्वोत्तर रेलवे) की कोर्ट में सामान्य तरीके से अधिवक्ता कृष्ण कुमार श्रीवास्तव और पंचम राम के साथ पेश हुआ।
वकीलों की जुट गई भीड़
उधर, अर्जुन के समर्पण की जानकारी मिलते ही एसपी क्राइम ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद और क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह सहित अन्य कई थानों की पुलिस दीवानी कचहरी पहुंची। अचानक पुलिस की आवाजाही बढ़ते देख कर मौके पर वकीलों और वादकारियों की भीड़ जुट गई थी। किसी तरह से अर्जुन को लॉकअप में डाला गया और फिर उसे जेल भेजा गया।
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