Corona in Ghazipur: जिंदगी बचाने वाले भी संकट में, सीएमओ, दो एसीएमओ, महामारी नोडल सहित कई हुए संक्रमित
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरल का संक्रमण स्वास्थ्य महकमे तक पहुंच चुका है। इससे मुख्य चिकित्साधिकारी समेत दर्जनभर स्वास्थ्यकर्मी जूझ रहे हैं। आम लोगों को सुरक्षित रखने और उनकी जिंदगी बचाने वाले आज खुद संक्रमित हो रहे हैं।
स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी, कोरोना महामारी के नोडल अधिकारी, कई चिकित्सक समेथ दर्जनभर कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित होने से जांच एवं अन्य कार्य प्रभावित होना तय है। अधिक संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने से महकमे में अफरा-तफरी व डर बना हुआ है।
जिले में कोरोना पॉजिटिव मिले 85 फीसदी लोग ठीक हुए हैं, तो 21 संक्रमितों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में कई घर उजड़ गए हैं। अब भी कई जिंदगियां कोविड सेंटर में सिसक रहीं हैं। जिले में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ने के कारण लोग दहशत में हैं। जबकि कई पीड़ित परिवार बेरोजगारी का दंश झेल रहा है। करीब 45 से अधिक सरकारी कर्मचारी इन दिनों कोरोना संक्रमित अपना इलाज करा रहे हैं। इनमें दर्जनभर पुलिसकर्मी शामिल हैं।
जिले में जब कोरोना ने पैर जमाना शुरू किया था, तब प्रवासी लगातार महानगरों से अपने गांव आ रहे थे। कोरोना को रफ्तार देने में इनकी भूमिका रही है। प्रवासियों की माने तो लाकडाउन शुरु होने व महामारी फैलने के बाद काम धंधों पर ताला लग गमा। सब कुछ बंद होने के बाद अब एक ही रास्ता था अपने घर को लौटना।
अब बेरोजगारी व आर्थिक तंगी की वजह से फिर से वापस शिफ्ट होना चाहते हैं। 30 फीसदी लोग महानगरों में जा चुके हैं। घर रह कर आने के बाद से वो काफी तनाव में हैं। क्योंकि ज्यादातर लोग अभी परिवार गांव में छोड़कर गए हैं।
कुछ लोग महानगरों में वापस नहीं जाना चाह रहे थे। लेकिन भुखमरी व घरवालों की जिद के बाद उन्होंने फिर से जाना जरूरी समझा। पैसे के अभाव में घर में रखे सामान कीमती आभूषण और दूसरी वस्तुएं भी धीरे-धीरे बिक चुकी हैं। लोग पूरी तरह से बिखर चुके हैं।
उधर जनपद में कोरोना संक्रमण के तेजी से बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए नगर सहित ग्रामीण इलाकों में भय का माहौल कायम है। पहले से शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, उद्योग विभाग राजस्व विभाग के साथ ही अब स्वास्थ्य महकमा भी संक्रमण की चपेट में आ गया है। ऐसे में आम लोगों की सुरक्षा, इलाज तथा जांच कहीं न कहीं प्रभावित होना तय है। अब देखना है कि स्वास्थ्य महकमा इस चुनौती का सामना कैसे करता है?