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गाजीपुर में कृषि विभाग की कारगुजारी, एक किसान के नाम पर बनाईं 109 आईडी
ब्यूरो,अमर उजाला,गाजीपुर
Updated Sun, 25 Jun 2017 11:54 PM IST
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लक्ष्य के बहाने धन हड़पने के लिए कृषि विभाग ने की कारगुजारी
गाजीपुर कृषि विभाग में बड़े पैमाने पर किसानों की फर्जी आईडी बनाने का मामला सामने आया है। अकेले सदर ब्लाक में एक किसान के नाम से 109 आईडी बनाई गई है। यही नहीं, कई आईडी तो अंग्रेजी के अक्षर ई, जे, बी, ओआई, पीओआई, पीके, जेके, एसए के नाम पर बना दी ई हैं। सारा खेल डाटा इंट्री का पैसा हड़पने के लिए किया गया है।
शासन की योजनाओं का लाभ और अनुदान राशि किसानों को उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग में पंजीकरण कराया जाता है। किसानों को मिलने वाले अनुदान की प्रक्रिया और पंजीकरण का कार्य उप निदेशक कृषि के कार्यालय से होता है।
हर किसान के डाटा की इंट्री के बदले पांच रुपये मिलते है। शासन से विभाग को पंजीकरण का लक्ष्य भी दिया जाता है। जिले के सदर ब्लाक में 2015-2016 में एक लाख से अधिक का लक्ष्य मिला था।
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दिसंबर 2016 तक लक्ष्य पूरा नहीं होने और शासन का दबाव बढ़ने पर विभाग ने बड़े पैमाने पर फर्जी आईडी बना कर लक्ष्य पूरा कर लिया। इसमें अकेले मुदवल गांव के हरिनाथ के नाम पर 109 आईडी जनरेट की गई है।
ऐसे ही कई और नामों से कई-कई आईडी बनी हैं। यही नहीं, ई पुत्र यू, जे पुत्र एन, बी पुत्र बी-बी जैसे अंग्रेजी के अक्षरों के नाम से भी आईडी बनाई गई हैं।
अनुदान पंजीकरण के नाम पर इसी तरह का फर्जीवाड़ा मनिहारी और मुहम्मदाबाद सहित अन्य ब्लाकों में भी किया गया।
खास बात यह है कि पंजीकरण के लिए बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, खसरा और खतौनी का नंबर ऑनलाइन अंकित किया जाता है। इसकी फोटो कॉपी विभाग में जमा की जाती है। ये सारी प्रक्रिया पूरी किए बिना आईडी जनरेट कर ली गई और डाटा इंट्री की राशि भी आ गई।
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शासन की योजनाओं का लाभ और अनुदान राशि किसानों को उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग में पंजीकरण कराया जाता है। किसानों को मिलने वाले अनुदान की प्रक्रिया और पंजीकरण का कार्य उप निदेशक कृषि के कार्यालय से होता है।
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हर किसान के डाटा की इंट्री के बदले पांच रुपये मिलते है। शासन से विभाग को पंजीकरण का लक्ष्य भी दिया जाता है। जिले के सदर ब्लाक में 2015-2016 में एक लाख से अधिक का लक्ष्य मिला था।
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दिसंबर 2016 तक लक्ष्य पूरा नहीं होने और शासन का दबाव बढ़ने पर विभाग ने बड़े पैमाने पर फर्जी आईडी बना कर लक्ष्य पूरा कर लिया। इसमें अकेले मुदवल गांव के हरिनाथ के नाम पर 109 आईडी जनरेट की गई है।
ऐसे ही कई और नामों से कई-कई आईडी बनी हैं। यही नहीं, ई पुत्र यू, जे पुत्र एन, बी पुत्र बी-बी जैसे अंग्रेजी के अक्षरों के नाम से भी आईडी बनाई गई हैं।
अनुदान पंजीकरण के नाम पर इसी तरह का फर्जीवाड़ा मनिहारी और मुहम्मदाबाद सहित अन्य ब्लाकों में भी किया गया।
खास बात यह है कि पंजीकरण के लिए बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, खसरा और खतौनी का नंबर ऑनलाइन अंकित किया जाता है। इसकी फोटो कॉपी विभाग में जमा की जाती है। ये सारी प्रक्रिया पूरी किए बिना आईडी जनरेट कर ली गई और डाटा इंट्री की राशि भी आ गई।