हल्दी की रस्म के साथ पड़ गई गाजी मियां की लग्न, सामाजिक दूरी का पालन करते हुए निभाईं गईं सारी रस्में
कोरोना कर्फ्यू के कारण गिनती के रहे अकीदतमंद, फातिहा के बाद की गई चादरपोशी, मजार पर लगाई हल्दी
विस्तार
वाराणसी में हजरत सैयद सालार मसूद गाजी मियां रहमतुल्लाह अलैह की हल्दी रस्म के साथ ही लग्न रखी गई। रविवार को कोरोना संक्रमण को देखते हुए सामाजिक दूरी का पालन करते हुए रस्म ओ रिवाज निभाए गए।
बड़ी बाजार स्थित गाजी मियां के रौजे पर सवा महीने पूर्व लगन रखी गई। बाबा को गुस्ल कराने के बाद संदलपोशी और चादरपोशी की गई। इसके बाद मजार पर हल्दी का लेपन किया गया। आस्ताने की दीवारों पर हल्दी लगे पंजों की छाप लगाई गई। रस्म होने के बाद कुल शरीफ और सलातो सलाम पढ़ा गया और मुल्क में अमन चैन, खुशहाली के साथ ही कोरोना के खात्मे की दुआ की गई।
गाजी मियां की लग्न के साथ ही उनकी शादी की रस्मों की शुरुआत भी हो गई जो सवा महीने तक चलेंगी। दरगाह गाजी मियां के गद्दीनशीन सचिव हाजी एजाजुद्दीन हाशमी की देखरेख में हल्दी की रस्म निभाई गई। इस दौरान आयोजन में इलाकाई जायरीन और दरगाह कमेटी के सदर हाजी सिराजुद्दीन अहमद, नियाजुद्दीन हाशमी, डॉ. अजीजुर्रहमान, जीशान अहमद, अब्दुल अब्दुल्लाह हाशमी की अगुवाई में फातिहा और चादरपोशी की गई। जायरीन को भी हल्दी लगाई गई। सीमित संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर मौजूद रहे। इसके बाद कुछ ही देर में दरगाह को बंद कर दिया गया।
21 मई को पलंगपीढ़ी रवाना होगी बहराइच
हाजी एजाजुद्दीन हाशमी ने बताया कि 21 मई को गाजी मियां की पलंगपीढ़ी व मेदनी का कार्यक्रम होगा। कमेटी के प्रतिनिधि हाजी अब्दुल रऊफ, निजामुद्दीन, छोटक व कैसर हयात हाशमी पलंग पीढ़ी व मेदनी को लेकर चौकाघाट, शिवपुर होते हुए बहराइच के लिए रवाना होंगे। इसके बाद 29 मई से तीन दिवसीय मेला शुरू होगा। 30 मई को गाजी मियां की बरात छोहरा से हाजी सनाउल्लाह के निवास स्थान से निकलेगी और सलारपुर स्थित गाजीमियां के रौजा परिसर पहुंचेगी। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए हिंदू और मुसलमान दोनों संप्रदाय के लोग मेले में शामिल होते हैं। मेले में वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अकीदतमंद उमड़ेंगे। मन्नतें पूरी होने पर अकीदतमंद आस्ताने पर मुर्गे की बलि चढ़ाएंगे। वहीं 13 जून को बहराइच से लोगों की वापसी के बाद काजी सादुल्लापुरा में फिरती का मेला लगेगा।