{"_id":"69c5a39c7d49da69420c3892","slug":"german-historian-explains-the-art-of-engineering-and-conservation-of-kanchipuram-temple-varanasi-news-c-20-vns1056-1335126-2026-03-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: जर्मन इतिहासकार ने बताई कांचीपुरम मंदिर की इंजीनियरिंग और संरक्षण की कला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: जर्मन इतिहासकार ने बताई कांचीपुरम मंदिर की इंजीनियरिंग और संरक्षण की कला
विज्ञापन
आईआईटी बीएचयू में बृहस्पतिवार को जर्मनी के हेजलबर्ग विश्वविद्यालय की इतिहासकार ने कांचीपुरम मंदिर की इंजीनियरिंग और संरक्षण की कला टेक्नोसेवियों के साथ साझा की। इतिहास, मूर्त और अमूर्त विरासत के साथ भारत में मंदिर कथाओं के बदलते स्वरूप पर चर्चा हुई। पत्थरों के बीच बने मंदिर और उनकी कलाकृतियों की इंजीनियरिंग छात्रों के साथ साझा की गई।
संस्थान के देव और वर्धना लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में हेजलबर्ग विवि की इतिहास विशेषज्ञ प्रो. हुस्केन ने कहा कि मंदिर कथाएं संस्कृत और तमिल पांडुलिपियों, मंदिर स्थापत्य, मूर्तिकला, भित्ति चित्रों, अनुष्ठानों और स्थानीय समुदायों की मौखिक परंपराओं के माध्यम से संरक्षित कर फैलाई जा रही हैं। मंदिर संस्कृति को समझने के लिए पाठ, परंपराओं और भौतिक संरचनाओं के बीच अंतरसंबंधों का अध्ययन जरूरी है।
प्रो. हुस्केन ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती है एक से ज्यादा स्रोत होना। इनका विश्लेषण कठिन है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्रोतों को जोड़ने के लिए एक ठीकठाक डेटाबेस विकसित किया जा रहा है। यह डिजिटल ढांचा मंदिर की कथाओं को उनके अनुष्ठानिक, स्थापत्य और भौगोलिक संदर्भ में समझने के नए रास्ते तैयार करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
संस्थान के देव और वर्धना लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में हेजलबर्ग विवि की इतिहास विशेषज्ञ प्रो. हुस्केन ने कहा कि मंदिर कथाएं संस्कृत और तमिल पांडुलिपियों, मंदिर स्थापत्य, मूर्तिकला, भित्ति चित्रों, अनुष्ठानों और स्थानीय समुदायों की मौखिक परंपराओं के माध्यम से संरक्षित कर फैलाई जा रही हैं। मंदिर संस्कृति को समझने के लिए पाठ, परंपराओं और भौतिक संरचनाओं के बीच अंतरसंबंधों का अध्ययन जरूरी है।
विज्ञापन
प्रो. हुस्केन ने यह भी बताया कि इस क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती है एक से ज्यादा स्रोत होना। इनका विश्लेषण कठिन है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्रोतों को जोड़ने के लिए एक ठीकठाक डेटाबेस विकसित किया जा रहा है। यह डिजिटल ढांचा मंदिर की कथाओं को उनके अनुष्ठानिक, स्थापत्य और भौगोलिक संदर्भ में समझने के नए रास्ते तैयार करता है।
विज्ञापन