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Varanasi News: बीएचयू ने खत्म किया डीलिट-डीएससी कोर्स, रैंकिंग सुधार में इनका कोई योगदान नहीं

Mon, 18 Nov 2024 12:41 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2024 12:41 AM IST
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Geopolished Delete-DSc Courses, They Have No Contribution in Ranking Improvement.
-एकेडमिक काउंसिल की बैठक में सदस्यों ने माना, फैसला रिसर्च के लिए एक साल का समय बहुत कम
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माई सिटी रिपोर्टर


वाराणसी। बीएचयू में डी.लिट और डीएससी कोर्स को बंद कर दिया गया है। वजह ये बताई गई कि बीएचयू की ग्लोबल रैंकिंग में इनका कोई योगदान नहीं है और रिसर्च के लिए एक साल का समय बहुत कम होता है। ये बातें हाल में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में रखी गई थीं, जिसे मान लिया गया है। इन दोनों कोर्स को बंद करने का प्रस्ताव विज्ञान संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी की अध्यक्षता में बनाई गई जांच कमेटी में रखा था।

शिक्षा नीति में भी नहीं है शामिल
एकेडमिक काउंसिल के एजेंडे में बताया गया कि डी.लिट और डी.एससी कोर्स से बीएचयू की रैंकिंंग में सुधार नहीं होता। अभ्यर्थी को थीसिस जमा करने के लिए सिर्फ एक ही साल का समय मिलता है। इतने कम दिनों में उच्च गुणवत्ता का रिसर्च नहीं हो पाता। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इस कोर्स को स्थान नहीं दिया गया है। इस डिग्री ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता ही खो दी है। ऐसे में इसे तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाए।
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हाल ही में 87 साल के बुजुर्ग ने पूरा किया था रिसर्च
बीएचयू के कई प्रोफेसर और बाहर से आए विद्वानों ने बीएचयू से डी.लिट और डी.एससी की उपाधि ली है। दो साल पहले 87 साल की उम्र में डॉ. अमलधारी सिंह ने ऋग्वेद की नई शाखा पर रिसर्च किया था। उनके अलावा अब तक बीएचयू में संगीत से जुड़ीं डॉ. विधि नागर, कोविड में जान गवां चुके भू्गोलवेत्ता प्रो. रवि शंकर सिंह, अर्थशास्त्री डॉ. अनूप मिश्रा, आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. सचिन तिवारी ने बीएचयू से डी.लिट की उपाधि ग्रहण की है।
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दो तरह से दी जाती है ये उपाधि

बीएचयू में दो तरह से डी.लिट और डी. एससी की उपाधि दी जाती है। एक तो ग्रहण की जाती है और दूसरा मानद उपाधि के तौर पर ये डिग्री दी जाती है। मानद उपाधि को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि, बीते कई दीक्षांत में मानद उपाधि का ये सम्मान नहीं दिया गया है।
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