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चित्रकूट जेल में गैंगवार: बनारस से ही शुरू हुआ था जेल में हत्याओं का सिलसिला, मेराज की हत्या से जरायम की दुनिया में बेचैनी

Fri, 14 May 2021 10:54 PM IST
उत्पल कांत ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला, वाराणसी
ललित शंकर पांडेय, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 14 May 2021 10:54 PM IST
सार

दशक पूर्व मार्च 2004 में सपा सभासद बंशी यादव की जिला जेल के अंदर हुई थी हत्या,  मुन्ना बजरंगी के शार्प शूटर अन्नू तिपाठी को भी सेंट्रल जेल के अंदर गोलियों से कर दिया गया था छलनी, तीन साल पूर्व पूर्वांचल के माफिया डान मुन्ना बजरंगी की भी बागपत जेल में हुई थी गोली मारकर हत्या।

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Gangwar In Chitrakoot Jail murders in jail started from Banaras itself now fear in criminals after mukhtar ansari nearest meraj murder case
मेराज - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

 जरायम जगत से जुड़े अपराधी अपने विरोधियों और पुलिस की एनकाउंटर से बचने के लिए सबसे सुरक्षित जेल को ही मानते हैं। हालांकि अब जेल में जिस तरह से हत्याएं और गैंगवार की घटनाएं हो रही हैं, उससे जरायम की दुनिया में छाए रहने वालों में भय और बेचैनी बढ़ गई है।

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पूर्वांचल के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी मेराजुद्दीन उर्फ मेराज की हत्या के बाद से जेल में बंद उसके करीबियों में दहशत है। जेल में हत्याओं का सिलसिला बनारस से ही शुरू हुआ था।
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14 वर्ष पूर्व तीन मार्च 2004 को सपा सभासद बंशी यादव की जिला जेल के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

वारदात को अंजाम पूर्वांचल के माफिया मुन्ना बजरंगी के इशारे पर शार्प शूटर अन्नू त्रिपाठी व बाबू यादव ने दिया था। हालांकि साल भर के अंदर ही अन्नू त्रिपाठी की भी सेंट्रल जेल के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अन्नू की हत्या का आरोप कुख्यात संतोष गुप्ता उर्फ किट्टू पर था। इसके बाद यह सिलसिला शुरू हुआ तो प्रदेश की अन्य जेलों में अब तक जारी है।
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नौ जुलाई 2018 को पूर्वांचल के माफिया डान मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में गोली मारकर हुई हत्या ने तो जरायम जगत में खलबली मचा दी थी। पश्चिम के कुख्यात सुनील राठी ने मुन्ना बजरंगी को अलसुबह ही गोलियों से भून दिया था। सूबे की अन्य जेलों में हत्या और हत्या के प्रयास जैसी घटनाएं अब आम हो गई हैं। 

मेराज के करीबियों की ऊपर नीचे हो रही हैं सांसें


मऊ के बाहुबली विधायक मुख्यार अंसारी के करीबी मेराज भाई की चित्रकूट जेल के अंदर हुई हत्या और पश्चिमी के कुख्यात मुकीम काला, अवध के कुख्यात अपराधी अंशु दीक्षित की हत्याओं ने एक बार फिर से बता दिया है कि जेल अब सुरक्षित नहीं है।

एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक असलहे रखने के शौकीन मेराज की हत्या के बाद जिला जेल चौकाघाट में बंद उसके पांच से छह करीबियों की सांसें ऊपर नीचे हो रही हैं। मेराज के भाई सेराज और भांजे परवेज को कैंट पुलिस ने बीते साल सितंबर में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मेराज की हत्या के बाद बनारस से लेकर गाजीपुर व मऊ तक हड़कंप मचा हुआ है।

पूर्वांचल की जेलों में वर्चस्व की लड़ाई

पूर्वांचल की जेलों में अपना वर्चस्व स्थापित करने की जंग में पगली घंटी बजती रही है। मारपीट, तोड़फोड़ और बंदी रक्षकों से लेकर जेलर तक पर अपना प्रभाव छोड़ने को लेकर कुख्यात कुछ भी कर गुजरते हैं। चित्रकूट जेल में गैंगवार नया नहीं है। इसके पूर्व दो अप्रैल 2016 में जिला जेल चौकाघाट में भी बंदियों ने मारपीट का आरोप लगाकर जेल को पांच से छह घंटे तक अपने कब्जे में रखा था।

उस दौरान डिप्टी जेलर को बंधक बनाकर बंदियों ने पिटाई की थी। इसके बाद भी बंदियों के बीच आपस में टकराहट होती रही। 2018 में भी बंदियों ने वर्चस्व की जंग में जेल के माहौल को अशांत कर दिया था। सियासी रसूख वाले बंदियों को जेल के अंदर मादक पदार्थ, मोबाइल चलाने की छूट को लेकर भी माहौल तल्ख रहता है। वाराणसी, गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, जौनपुर और मिर्जापुर जेल में वर्चस्व की लड़ाई चलती है। 

डिप्टी जेलर की हो चुकी है हत्या

जेल के अंदर कैदियों की बात न मानने का भी अंजाम बुरा होता है। जेल के अंदर माफिया मुन्ना बजरंगी की शर्तों को न मानने पर चौकाघाट जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की 23 नवंबर 2013 को पांडेयपुर क्षेत्र में जिम से बाहर निकलने के दौरान अंधाधुंध गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई थी।

बताया जाता था कि मुन्ना बजरंगी के शार्प शूटर अमजद, वकील पांडेय, राजेश चौधरी और रिंकू सिंह ने डिप्टी जेलर की हत्या की थी, जिसमें अमजद व वकील पांडेय को प्रयागराज में एसटीएफ ने चार मार्च 2021 को मुठभेड़ में मार गिराया था।
 

बनारस से लेकर रायबरेली तक दर्ज थे मेराज पर 20 मुकदमे

विधायक मुख्तार अंसारी के साथ मिलकर काम करने वाले मेराज पर पहला मुकदमा वर्ष 2002 में हत्या व हत्या का प्रयास का सिगरा थाने में दर्ज हुआ था। इसके बाद 2003 में ही अवैध असलहा और मादक पदार्थ रखने में दो मुकदमे कैंट थाने में दर्ज हुए थे। इसके बाद भी मेराज का नेटवर्क अवध क्षेत्र में विस्तारित होने लगा और अवैध असलहा रखने के मामले में रायबरेली कोतवाली में दो बार मुकदमा दर्ज हुआ था। जैतपुरा थाने में भी साल दर साल तीन मुकदमे मेराज पर दर्ज हुए थे।

मुख्तार का वरदहस्त होने के कारण जेल के अंदर भी मेराज बहुत दिन तक नहीं रह पाता था। चौक, सिगरा और कैंट थाने में मेराज पर अधिकतर मुकदमे अवैध असलहा रखने के आरोप में ही दर्ज हुए थे। मेराज पर आखिरी मुकदमा कैंट थाने में 23 जनवरी 2021 में धोखाधड़ी का दर्ज हुआ था। पुलिस डोजियर के अनुसार मेराज पर कुल 20 आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।

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