उफान पर गंगाः वाराणसी के कई इलाकों में घुसा पानी, मंत्री नीलकंठ तिवारी ने लिया जायजा, बोले- राहत कार्य में न आए कोई कमी
प्रदेश के पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। कोनिया क्षेत्र में मंत्री ने एनडीआरएफ टीम संग बाढ़ से घिरे मकानों को देखा। कहा कि राहत कार्य में कोई कमी न आए।
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वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के पार चला गया है। गंगा किनारे निचले इलाके की बस्तियों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है। हालात ये हो गए हैं कि कई इलाकों में पलायन शुरू हो गया है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रदेश के पर्यटन मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी ने शनिवार को बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। कोनिया क्षेत्र में मंत्री ने एनडीआरएफ टीम संग बाढ़ से घिरे मकानों को देखा।
कहा कि राहत कार्य में कोई कमी न आए। मंत्री ने प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों का कुशल क्षेम जाना। हर आवश्यक मदद दिलाने की बात कही। भ्रमण के दौरान संबंधित अधिकारियों को सम्पूर्ण बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में राहत सामग्री उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने साफ-सफाई एवं पानी कम होने के बाद दवा का छिड़काव करने का विशेष रूप से ध्यान देने को कहा।
मौके पर उपस्थित एनडीआरएफ टीम को लगातार रेकी करने और बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने को कहा। बाढ़ वाले इलाके में साफ सफाई बनी रहे। राहत सामग्री वितरण में किसी प्रकार की कोई कमी न हो। साथ ही साथ मेडिकल व्यवस्था भी सुचारू रूप से पीड़ित परिवारों तक पहुंचती रहे।
इधर, संभावित बाढ़ से निपटने के लिए वाराणसी जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। गंगा को खतरे के निशान के करीब देख कर प्रमुख गंगा घाटों पर पुलिस तैनात की गई है। एनडीआरएफ की 11वीं वाहिनी के जवान लगातार मोटरबोट से पेट्रोलिंग कर रहे हैं। सामने घाट क्षेत्र की गंगा किनारे की कॉलोनियों में पानी घुस गया है।
मारुति नगर इलाके में 50 से ज्यादा घर पानी की चपेट में हैं। बढ़ाव की रफ्तार से कॉलोनी के लोग दहशत में है। बता दें कि बलिया जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। वहीं गाजीपुर, जौनपुर और मिर्जापुर जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है।
वरुणा में पलट प्रवाह से खलबली, पलायन जारी
गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण असि और वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में हैं। पानी से घिर चुके इन मकानों में रहने वालों ने ऊंची बस्तियों में किराए पर कमरा लेकर अपना सामान वहां पहुंचाना शुरू कर दिया है।
वरुणा किनारे बसी बस्तियां कोनिया, दीनदयालपुर, नक्खीघाट, पुलकोहना में दो सौ से अधिक मकान पानी से घिर चुके हैं। शुक्रवार सुबह से लोग अपने जरूरी सामानों के साथ पलायन कर रहे हैं। तिनपुलवा के नीचे से होते हुए वरुणा में गिरने वाले नाले के दोनों ओर बने अधिकतर मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। पुलकोहना से नक्खीघाट के बीच दर्जनों की संख्या में मकान पानी से घिर गए हैं। खतरे को देखते हुए पलायन जारी है।
शवदाह के लिए बढ़ी मुसीबतें
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.42 मीटर पहुंच गया जो खतरे के निशान से महज 84 सेंटीमीटर नीचे है।