Varanasi: गंगा में उफान से तटवासियों की बढ़ती जा रही मुश्किलें, शवदाह करने में दिक्कत, नौकायन पर लगा बैन
वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु की ओर अब बढ़ने लगी है। रविवार को रात आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 65.41 मीटर पर पहुंच चुका था और जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी था।
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वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव की रफ्तार भले ही कम है, लेकिन तटवासियों की मुश्किलें बढ़ती जा रहीं हैं। घाट की सीढि़यां जैसे-जैसे गंगा चढ़ रही है, वैसे-वैसे गंगा आरती भी सिमटती जा रही है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह यात्रियों को शवदाह करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नौका के संचालन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। गंगा अब चेतावनी बिंदु से केवल 4.85 मीटर नीचे बह रही है।
रविवार को हर घंटे एक सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ती गंगा चेतावनी बिंदु की ओर अब बढ़ने लगी है। रविवार को रात आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 65.41 मीटर पर पहुंच चुका था और जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ाव जारी था। बढ़ते जलस्तर से अनुमान लगाया जा रहा है कि अगले सप्ताह तक यह चेतावनी बिंदु को छू लेगा।
गंगा के जलस्तर से वरुणा में भी हलचल तेज
गंगा का पानी नमो घाट (खिड़किया घाट) के रैंप तक पहुंच गया है। इधर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट के मुक्ताकाशीय मंच पर भी गंगा का पानी लहरा रहा है। उधर, गंगा के जलस्तर से वरुणा में भी हलचल तेज हो गई है। कोनिया घाट के पास वरुणा का पानी तलहटी से ऊपर हिलोरे मार रहा है।
बघवानाला और नक्खी घाट में निचले इलाकों में रहने वालों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। बढ़ते जलस्तर के कारण नाविकों ने भी नौकाओं को किनारे पर बांध दिया है और 24 घंटे निगरानी की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार को सुबह आठ बजे 65.29 मीटर था। रात आठ बजे 65.41 मीटर तक पहुंच चुका था।
बाढ़ के चलते एसटीपी के बंद होने का बढ़ा खतरा
गंगा में बाढ़ के चलते एसटीपी के बंद होने का खतरा बढ़ गया है। इसको लेकर जल निगम ने सभी एसटीपी पर सतर्कता बरतने को कहा है। बाढ़ के समय नालों के जरिये सीवर पास नहीं हो पाता है और शोधन कार्य प्रभावित होता है। ऐसे में एसटीपी का संचालन बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता है।
जल निगम के मुख्य अभियंता विशेश्वर प्रसाद ने बताया कि अभी सभी एसटीपी काम कर रही है। बाढ़ आने पर रमना प्लांट पर पहले असर पड़ता है। इसके अलावा अन्य प्लांट की भी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की दिक्कत न आने पाए।