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वाराणसी : शहरवासियों के सिर पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, खतरे के निशान की ओर बढ़ रही गंगा

Mon, 19 Aug 2019 02:05 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Mon, 19 Aug 2019 02:05 PM IST
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ganga water level constantly increasing heading towards danger mark Fear of flood in varanasi
लगातार बढ़ रहा गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला

गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को जलस्तर चेतावनी बिंदु के नजदीक पहुंच गया। यदि इसी गति से जलस्तर बढ़ता रहा तो मंगलवार को यह चेतावनी बिंदु के पार पहुंच सकता है। शवदाह भी गलियों में होने लगा है। गंगा के साथ वरुणा भी उफान पर है। इससे निचले इलाके के लोग घर छोड़ने लगे हैं।

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पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हुई जबरदस्त बारिश के चलते गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर रविवार शाम पांच बजे 67.66 मीटर था, वहीं सोमवार शाम पांच बजे तक यह बढ़कर 69.12 मीटर हो गया।
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दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती छत पर हुई


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गंगा में बढ़ाव के कारण वरुणा में भी जलस्तर बढ़ने से तटीय इलाकों में रहने वालों की धड़कनें तेज हो गई हैं। शुक्रवार शाम पांच बजे जलस्तर 65.30 मीटर था तो शनिवार को 65.25 मीटर पर पहुंच गया था। चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है। उच्चतम बाढ़ बिंदु 73.90 मीटर रहा है।


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रविवार दोपहर बाद दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला मंदिर के मुख्य द्वार के सामने पांच फु ट से अधिक पानी आ चुका था। शाम पांच बजे गंगा का पानी मंदिर परिसर स्थित कुंड तक पहुंच गया। हरिश्चंद्र घाट पर शवों को गली में जलाया जा रहा है।

मणिकर्णिका घाट पर शव जलाने के लिए बने स्टैंड पानी में डूब गए हैं और यहां मढ़ियों पर शवदाह किया जा रहा है। गंगा में बढ़ाव की रफ्तार साढ़े तीन सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गई है। अपस्ट्रीम में कानपुर से हरिद्वार के बीच चार स्थानों पर बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने और उत्तराखंड के पहाड़ों पर भारी वर्षा के कारण जलस्तर में बढ़ा है।

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