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गंगा की लहरों पर दीपदान कर पूर्व राष्ट्रपति को दी श्रद्धांजलि
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पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर काशी में भी शोक की लहर है। दशाश्वमेध घाट पर पूर्व राष्टपति को गंगा की लहरों पर दीपदान कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वहीं संत समाज और काशी के कलाकारों ने भी पूर्व राष्ट्रपति को नमन किया। सोमवार को दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि की ओर से होने वाली गंगा आरती के पूर्व गंगा में दीपदान किया। दीपदान के उपरांत पूर्व राष्ट्रपति की आत्मा की शांति की कामना की गई। इस दौरान सुशांत मिश्र, हनुमान यादव मौजूद रहे।
कांची शंकराचार्य की गिरफ्तारी का किया था विरोध
गंगा महासभा के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि कुलीन ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण प्रणब दा शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। प्रत्येक शारदीय नवरात्रि के समय दादा अपने पैतृक गांव में मां दुर्गा के पूजन के लिए जाते थे। जब उन्होंने कांची के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी के दौरान केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रतिरोध दर्ज कराते हुए कहा कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना सिर्फ हिंदू संत-महात्माओं तक ही सीमित है। क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखा सकती है। कांची शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती जी के जेल से आने के बाद राष्ट्रपति रहते हुए कांची मठ में तीन दिन का प्रवास किया था।
कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि
वाराणसी। पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय व कांग्रेस नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व विधायक ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. प्रणब मुखर्जी जी के निधन की खबर से स्तब्ध हूं। देश के प्रति निष्ठा, कत्र्तव्यपरायणता व हर क्षेत्र में उनका योगदान सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने सदैव कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों के साथ विचारधारा को मजबूती प्रदान की व हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किए। कांग्रेस परिवार ने अपना मार्गदर्शक खो दिया। जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल व महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने संयुक्त रूप से कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के निधन की खबर से हम सब मर्माहत व दु:खी हैं।
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आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे प्रणब दा
वाराणसी। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का निधन अपूरणीय क्षति है। भारतीय राजनीति के क्षेत्र में मील का पत्थर स्थापित करने वाले तथा अकादमिक दृष्टि से महनीय विद्वान प्रणव मुखर्जी का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। महात्मा गांधी काषी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रवि प्रकाश पांडेय ने बताया कि 30 अगस्त 2014 को राष्ट्रपति भवन में मेरी प्रणव मुखर्जी जी से मुलाकात हुई थी। 29 नवंबर 2014 को राष्ट्रपति ने काशी विद्यापीठ पधारकर उक्त अधिवेशन का उद्घाटन किया था। इस कार्यक्रम में लगभग 16 देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग पांच हजार प्रतिभागियों को लोकतंत्र विविधता एवं विकास विषय पर प्रणव मुखर्जी द्वारा दिया गया भाषण अकादमिक जगत के लिए बहुमूल्य है। भाषण को मैंने पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाया था जो आज राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध है। ग्लोबल वार्मिंग तथा पर्यावरण के प्रति जनसामान्य को संवेदनशील करके विश्व में मानवता की रक्षा करना उनके विचार का केंद्र बिंदु था जो आज भी हम सभी के लिए अनुकरणीय विषय है।
आदर्श राष्टपति के रूप में रहेंगे हर दिल में जिंदा
पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि 1983 में नई दिल्ली में आयोजित क्रिटिक सर्किल आफ इंडिया अवार्ड समारोह में पूर्व राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थे। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने मुझे यह पुरस्कार प्रदान किया था। आज उनका तिरोधान हुआ है लेकिन हर भारतीय के हृदय में एक आदर्श राष्ट्रपति के रूप में जीवित रहेंगे।
बहुत प्रिय था उनको शास्त्रीय संगीत
सरोद वादक पं. विकास महाराज ने भी पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मेरा प्रारंभिक जीवन अपने पिता पं. नन्हकू महाराज के साथ कोलकाता में बीता। वहां कई आयोजनों में प्रणब मुखर्जी जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शास्त्रीय संगीत सुनना उनको इतना प्रिय था कि उन्होंने अपनी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को कथक की शिक्षा दिलाई। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि भगवान उनकी आत्मा को अपने शरण में स्थान दें।
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कांची शंकराचार्य की गिरफ्तारी का किया था विरोध
गंगा महासभा के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि कुलीन ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के कारण प्रणब दा शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। प्रत्येक शारदीय नवरात्रि के समय दादा अपने पैतृक गांव में मां दुर्गा के पूजन के लिए जाते थे। जब उन्होंने कांची के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी के दौरान केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रतिरोध दर्ज कराते हुए कहा कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना सिर्फ हिंदू संत-महात्माओं तक ही सीमित है। क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने की हिम्मत दिखा सकती है। कांची शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती जी के जेल से आने के बाद राष्ट्रपति रहते हुए कांची मठ में तीन दिन का प्रवास किया था।
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कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि
वाराणसी। पूर्व राष्ट्रपति के निधन पर कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय व कांग्रेस नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व विधायक ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. प्रणब मुखर्जी जी के निधन की खबर से स्तब्ध हूं। देश के प्रति निष्ठा, कत्र्तव्यपरायणता व हर क्षेत्र में उनका योगदान सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने सदैव कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों के साथ विचारधारा को मजबूती प्रदान की व हर वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किए। कांग्रेस परिवार ने अपना मार्गदर्शक खो दिया। जिलाध्यक्ष राजेश्वर पटेल व महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने संयुक्त रूप से कहा कि पूर्व राष्ट्रपति के निधन की खबर से हम सब मर्माहत व दु:खी हैं।
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आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहेंगे प्रणब दा
वाराणसी। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी का निधन अपूरणीय क्षति है। भारतीय राजनीति के क्षेत्र में मील का पत्थर स्थापित करने वाले तथा अकादमिक दृष्टि से महनीय विद्वान प्रणव मुखर्जी का व्यक्तित्व और कृतित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेंगी। महात्मा गांधी काषी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर रवि प्रकाश पांडेय ने बताया कि 30 अगस्त 2014 को राष्ट्रपति भवन में मेरी प्रणव मुखर्जी जी से मुलाकात हुई थी। 29 नवंबर 2014 को राष्ट्रपति ने काशी विद्यापीठ पधारकर उक्त अधिवेशन का उद्घाटन किया था। इस कार्यक्रम में लगभग 16 देशों के प्रतिनिधियों सहित लगभग पांच हजार प्रतिभागियों को लोकतंत्र विविधता एवं विकास विषय पर प्रणव मुखर्जी द्वारा दिया गया भाषण अकादमिक जगत के लिए बहुमूल्य है। भाषण को मैंने पुस्तक के रूप में प्रकाशित करवाया था जो आज राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध है। ग्लोबल वार्मिंग तथा पर्यावरण के प्रति जनसामान्य को संवेदनशील करके विश्व में मानवता की रक्षा करना उनके विचार का केंद्र बिंदु था जो आज भी हम सभी के लिए अनुकरणीय विषय है।
आदर्श राष्टपति के रूप में रहेंगे हर दिल में जिंदा
पद्मश्री डॉ. राजेश्वर आचार्य ने पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि 1983 में नई दिल्ली में आयोजित क्रिटिक सर्किल आफ इंडिया अवार्ड समारोह में पूर्व राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थे। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्होंने मुझे यह पुरस्कार प्रदान किया था। आज उनका तिरोधान हुआ है लेकिन हर भारतीय के हृदय में एक आदर्श राष्ट्रपति के रूप में जीवित रहेंगे।
बहुत प्रिय था उनको शास्त्रीय संगीत
सरोद वादक पं. विकास महाराज ने भी पूर्व राष्ट्रपति को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मेरा प्रारंभिक जीवन अपने पिता पं. नन्हकू महाराज के साथ कोलकाता में बीता। वहां कई आयोजनों में प्रणब मुखर्जी जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शास्त्रीय संगीत सुनना उनको इतना प्रिय था कि उन्होंने अपनी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी को कथक की शिक्षा दिलाई। बाबा विश्वनाथ से प्रार्थना है कि भगवान उनकी आत्मा को अपने शरण में स्थान दें।