{"_id":"5ee286f68ebc3e4311719457","slug":"ganga-city-news-vns5296590137","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉकडाउन की तर्ज पर बने गंगा स्वच्छता के लिए नीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉकडाउन की तर्ज पर बने गंगा स्वच्छता के लिए नीति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। लॉकडाउन में गंगाजल में काफी सुधार हुआ है। इसको देखते हुए इसी तर्ज पर गंगा स्वच्छता की नीति तैयार करने पर विमर्श तेज हो गया है। इस मामले में महामना मदन मोहन मालवीय गंगा शोध केंद्र के चेयरमैन प्रो. बीडी त्रिपाठी ने पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अपील की है कि लॉकडाउन के दौरान साफ हुई गंगा को आगे भी निर्मल और स्वच्छ रखने के लिए लॉकडाउन की तर्ज पर गंगा स्वच्छता के लिए नीति बनाई जाए।
उन्होंने शोध का हवाला देते हुए लॉकडाउन में हुए प्रयासों के बाद गंगा की स्थिति को फिर से अपने पुराने रूप में लाने के लिए इसी नीति पर कार्य करने की गुजारिश की है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण गंगा को प्रदूषित करने वाली कई सारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहीं। इसके कारण गंगाजल में काफी बदलाव आया। काशी में गंगा 25 से 30 फीसदी तक साफ हुईं।
प्रो. त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह अपील की है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद कल कारखाने, होटल, रेस्टोरेंट, स्लॉटर हाउस के मालिकों से यह शपथ पत्र लिया जाए कि वह गंगा को प्रदूषित नहीं करेंगे और यदि करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। यदि कुछ प्रयास किए जाए तो गंगा एक बार फिर से अपने उसी रूप में आ जाएंगी।
विज्ञापन
कहते हैं आंकड़े
शहर में रोजाना 300 एमएलडी सीवेज निकलता है जिसमें से 25 एमएलडी इंडस्ट्रियल वेस्टेज व 275 एमएलडी डोमेस्टिक वेस्टेज है।
400 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट वाराणसी में काम कर रहे हैं।
लॉकडाउन के कारण सिर्फ 28 दिनों में गंगाजल के प्रदूषण में 25 से 30 फीसदी की कमी आई है।
1970 के बाद 2020 में गंगा जल की शुद्धता सबसे बेहतर है।
विज्ञापन
उन्होंने शोध का हवाला देते हुए लॉकडाउन में हुए प्रयासों के बाद गंगा की स्थिति को फिर से अपने पुराने रूप में लाने के लिए इसी नीति पर कार्य करने की गुजारिश की है। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन के कारण गंगा को प्रदूषित करने वाली कई सारी गतिविधियां पूरी तरह से ठप रहीं। इसके कारण गंगाजल में काफी बदलाव आया। काशी में गंगा 25 से 30 फीसदी तक साफ हुईं।
विज्ञापन
प्रो. त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह अपील की है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद कल कारखाने, होटल, रेस्टोरेंट, स्लॉटर हाउस के मालिकों से यह शपथ पत्र लिया जाए कि वह गंगा को प्रदूषित नहीं करेंगे और यदि करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। यदि कुछ प्रयास किए जाए तो गंगा एक बार फिर से अपने उसी रूप में आ जाएंगी।
विज्ञापन
कहते हैं आंकड़े
शहर में रोजाना 300 एमएलडी सीवेज निकलता है जिसमें से 25 एमएलडी इंडस्ट्रियल वेस्टेज व 275 एमएलडी डोमेस्टिक वेस्टेज है।
400 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट वाराणसी में काम कर रहे हैं।
लॉकडाउन के कारण सिर्फ 28 दिनों में गंगाजल के प्रदूषण में 25 से 30 फीसदी की कमी आई है।
1970 के बाद 2020 में गंगा जल की शुद्धता सबसे बेहतर है।