गंगा में उफान, मुश्किल में घिरी जान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाम सात बजे गंगा का जलस्तर 71.62 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस बीच अस्सी मार्ग पर गंगा जगन्नाथ मंदिर के पास पहुंच गईं हैं। शीतला घाट की सब्जी मंडी में पानी सड़क पर हिलोरें मार रहा है और बाढ़ का मंजर देखने के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। शुक्रवार को दशाश्मेध घाट और शीतला घाट की गंगा आरती में पुरोहितों के अलावा गिनती के ही लोग पहुंच सके।
उधर, गलियों में बाढ़ का पानी आने से रास्ते जगह-जगह बंद हो गए हैं। इससे बुनियादी जरूरतों के सामान के लिए भी लोग परेशान हो रहे हैं। नदियों का रुख शहर की ओर होने से नालों का गंदा पानी सड़कों और घरों में घुसने लगा है। देर रात तक अस्सी, नगवां के बाढ़ राहत शिविरों में एक हजार से अधिक लोगों ने शरण ले ली थी। वरुणा किनारे के रमीदुल उलूम मदरसा और मढ़िया मदरसा में सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं, वहां उन्हें राहत के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
गंगा में बढ़ाव की रफ्तार में कमी तो दर्ज की गई है लेकिन जलस्तर बढ़ने से लोगों की सांस अटकी हुई है। शुक्रवार शाम तक जानकी बाग नगर, गंगा बाग नगर, प्रफुल्ल नगर, साकेत नगर, रोहित नगर, गांधी नगर, गायत्री नगर में भी असि नदी का पानी घुस गया। इससे पहले अस्सी, नगवा, गंगोत्री बिहार, महेश नगर, सत्यमनगर, रामानुज नगर कॉलोनी, सामने घाट, मदरवा, मारुति नगर में पानी घुसने सैकड़ों लोग प्रभावित हो चुके हैं।
गलियों में घुटने से ऊपर पानी भरने से जानकी नगर, रामानुज नगर और प्रफुल्ल नगर में दोपहर बाद प्रशासन ने तीन नावें लोगों को घरों से निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए लगवा दी। सफाई निरीक्षकों के साथ पानी के टैंकर भी भिजवा दिए गए, ताकि शिविरों में शरण ले रहे लोगों को पानी कि किल्लत का सामना न करना पड़े।
मणिकर्णिका घाट पर छतों, बुर्जियों के डूबने से जहां अंतिम संस्कार को लेकर शवों को गलियों में ही रोका जाने लगा है, वहीं हरिश्चंद्र घाट की गलियों में चिता लगाने के लिए जगह न होने की वजह से डोम परिवार से जुड़े लोगों ने कुछ देर के लिए काम ठप कर दिया। पार्षद राजेश यादव की पहल पर डोमराजा की खाली जमीन पर बाढ़ के दौरान चिताएं लगाने के लिए जगह देने के लिए सहमति बनाई गई, तब जाकर चिताएं जलनी शुरू हो सकीं।