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गंगा बेसिन में कम हुआ प्रवाह, बढ़ी चिंता, अब सेव गंगा की करनी होगी बात

Fri, 20 Mar 2020 04:42 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Fri, 20 Mar 2020 04:42 PM IST
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Ganga basin decreased flow, increased concern, now need to talk about Save Ganga
गंगा नदी - फोटो : अमर उजाला

गंगा बेसिन क्षेत्र के प्रवाह में कमी ने नदी विज्ञानियों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं। गंगा बेसिन में जल उपलब्धता की कमी होने से प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा है। तटवर्ती इलाकों में भूजल के स्तर में भी गिरावट आई है। नदी विज्ञानियों की रिपोर्ट के बाद अब केंद्र सरकार भी रणनीति बदलने पर विचार कर रही है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, 1993 में गंगा बेसिन में जल की मात्रा 525.02 बीसीएम (बिलियन क्यूबिक मीटर) से घटकर 509.52 बीसीएम पर पहुंच गई है। यानी जल उपलब्धता में 16 बीसीएम की कमी आई है।

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बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते तापमान बढ़ने से वाष्पीकरण होने और भूजल के अतिदोहन के कारण जल की उपलब्धता में कमी आई है। गंगा बेसिन का प्रवाह क्षेत्र यानी कैचमेंट एरिया 8,38,803 वर्ग किलोमीटर रह गया है जो 1993 में 8,61,452 वर्ग किलोमीटर हुआ करता था।

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उन्होंने केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट सौंपी है उसके अनुसार गंगा में प्रवाह कम होने से गंगा की घुलनशीलता की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। इससे कई जलीय जीव समाप्त हो गए और प्रदूषक तत्वों की मात्रा भी बढ़ी है। पानी का क म प्रवाह नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के प्रयासों पर पानी फेर दे रहा है।

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गंगा बेसिन में प्रवाह कम होना चिंता की बात है। अब क्लीन गंगा नहीं, सेव गंगा की बात करनी होगी।

प्रो. बीडी त्रिपाठी, नदी विज्ञानी

प्रवाह कम होने का कारण

  • भागीरथी, अलकनंदा और मंदाकिनी के मेन स्ट्रीम पर हाइड्रोपावर प्लांट बनाकर गंगा की मुख्य धारा को बंद करना।
  • हिमालयन क्षेत्र में लगातार रिस रहा है गंगा का जल।
  • भीमगौड़ा कैनाल के माध्यम से दूसरे राज्यों तक पानी पहुंचाना।
  • गंगा बेसिन के दोनों किनारों पर लिफ्ट कैनाल बनाकर सिंचाई करना।
  • फ्लड इरीगेशन तकनीक से सिंचाई के कारण बर्बाद हो रहा है 85 प्रतिशत पानी।
  • गंगा के तटीय इलाकों में बोरवेल, ट्यूबवेल से भूजल का अति दोहन।
  • भूजल स्तर गिरने से गंगा की रिचार्जिंग क्षमता हो रही कम।

 

Ganga basin decreased flow, increased concern, now need to talk about Save Ganga
गंगा - फोटो : अमर उजाला

समाधान

  • मेन स्ट्रीम को छोड़कर पतली धाराओं पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगें।
  • बांधों के निर्माण पर लगे रोक।
  • दूसरे प्रदेशों को पानी देने पर रोक के साथ ही उन्हें पानी की स्वयं की व्यवस्था के लिए तैयार करना होगा।
  • लिफ्ट कैनाल के माध्यम से फ्लड इरीगेशन के बजाय माइक्रो इरीगेशन तकनीक से हो सिंचाई।
  • वर्षा जल संचयन और रेन हार्वेस्टिंग तकनीक को सख्ती से लागू कराया जाए।

ये कहते हैं आंकड़े

  • एक बीसीएम में एक हजार अरब लीटर पानी होता है।
  • जल उपलब्धता 509.52 बीसीएम
  • जल उपलब्धता 525.02 बीसीएम (1993 में)
  • जल उपलब्धता में कमी 16 बीसीएम
  • 1985 से 2015 के बीच गंगा बेसिन में 914 बीसीएम बरसात हुई।
  • 1965-1984 के बीच गंगा बेसिन में 947 बीसीएम बरसात हुई।

गंगा बेसिन

हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक गंगा बेसिन का 2525 किलोमीटर का क्षेत्र है। गंगा पांच राज्यों से होकर गुजरती है।

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