{"_id":"6ab82ca59279c85d810ec791","slug":"from-ai-to-solar-energy-deliberations-at-bhu-on-future-energy-needs-varanasi-news-c-20-noi1138-1559104-2026-09-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: एआई से सौर ऊर्जा तक... बीएचयू में भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर मंथन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: एआई से सौर ऊर्जा तक... बीएचयू में भविष्य की ऊर्जा जरूरतों पर मंथन
विज्ञापन
ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास पर मंथन बीएचयू में एनर्जी कॉन्क्लेव का शुभारंभ ! बीएचयू
बदलती वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास और सतत ऊर्जा संक्रमण की चुनौतियों पर मंथन के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शनिवार को दो दिवसीय एनर्जी कॉन्क्लेव 2026 शुरू हुआ। पावरिंग द फ्यूचर : एनर्जी सिक्योरिटी, इकनॉमिक रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबल ट्रांजिशंस इन अ चेंजिंग वर्ल्ड विषय पर आयोजित सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने ऊर्जा के भविष्य, तकनीकी बदलाव और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विचार साझा किए।
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ऊर्जा की प्रासंगिकता अब केवल विद्युत, रासायनिक और यांत्रिक अभियांत्रिकी जैसे विषयों तक सीमित नहीं है। विनिर्माण और उत्पादन प्रक्रियाओं के पर्यावरणीय प्रभाव समेत विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा अध्ययन पहले मुख्य रूप से स्नातकोत्तर केंद्रों और विशेषीकृत कार्यक्रमों तक सीमित था, लेकिन अब स्नातक स्तर की शिक्षा में भी इसका विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में शोध और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
मुख्य वक्ता आईआईटी मुंबई के आशंक देसाई सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के प्रमुख प्रो. विनिश कुमार कथूरिया ने उभरती तकनीकों के अनपेक्षित प्रभावों पर चर्चा की। प्रो. कथूरिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़ी ऊर्जा जरूरतों पर भी विचार रखे की। उन्होंने बैटरी और सौर पैनलों के लिए नई सामग्रियों की खोज, मीथेन उत्सर्जन का पता लगाने और पर्यावरणीय निगरानी में एआई के इस्तेमाल को रेखांकित किया। अर्थशास्त्र विभाग, बीएचयू के विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार भट्ट भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. जेबी कोमारैया ने बताया कि यह ऊर्जा अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम का वार्षिक आयोजन है। इनमें भविष्य की ऊर्जा मांग एवं आर्थिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा अर्थशास्त्र एवं बाजार परिवर्तन जैस विषय शामिल हैं।
आईआईटी कानपुर के प्रो. अनूप सिंह ने जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन से संबंधित वैज्ञानिक समझ को प्रभावी कार्रवाई में बदलने की जरूरत बताई। केवीए इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स के प्रबंध निदेशक डॉ. विजय कुमार ने जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्यों में बदलने पर जोर दिया। आईआईटी बीएचयू के विद्युत अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि अर्थशास्त्र और विद्युत अभियांत्रिकी के बीच सहयोग विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करता है। उद्घाटन सत्र में बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स और प्लेसमेंट ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। सत्र का समापन पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पर्यावरण अध्ययन विभाग की सह-संयोजक डॉ. सुमन मोर के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
सौर ऊर्जा और सतत विकास पर स्मृति व्याख्यान
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. आर. सुब्रमण्यम स्मृति व्याख्यान हुआ। आईआईटी (बीएचयू) के पूर्व निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने सौर ऊर्जा, मानव विकास और सतत विकास लक्ष्यों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्य-7 यानी सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा पर चर्चा की। अध्यक्षता प्रो. बीवी सिंह ने की, जबकि प्रो. हरिकेश सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। प्रो. हरिकेश सिंह ने संसाधनों के उपयोग से जुड़े सवालों के समाधान में अर्थशास्त्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। दिवंगत डॉ. आर सुब्रमण्यम के पुत्र कर्नल ईशान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने जो आधार तैयार किया था, उसी पर आज भी उनकी विरासत आगे बढ़ रही है।
विज्ञापन
बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि ऊर्जा की प्रासंगिकता अब केवल विद्युत, रासायनिक और यांत्रिक अभियांत्रिकी जैसे विषयों तक सीमित नहीं है। विनिर्माण और उत्पादन प्रक्रियाओं के पर्यावरणीय प्रभाव समेत विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि ऊर्जा अध्ययन पहले मुख्य रूप से स्नातकोत्तर केंद्रों और विशेषीकृत कार्यक्रमों तक सीमित था, लेकिन अब स्नातक स्तर की शिक्षा में भी इसका विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में शोध और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य वक्ता आईआईटी मुंबई के आशंक देसाई सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के प्रमुख प्रो. विनिश कुमार कथूरिया ने उभरती तकनीकों के अनपेक्षित प्रभावों पर चर्चा की। प्रो. कथूरिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग और उससे जुड़ी ऊर्जा जरूरतों पर भी विचार रखे की। उन्होंने बैटरी और सौर पैनलों के लिए नई सामग्रियों की खोज, मीथेन उत्सर्जन का पता लगाने और पर्यावरणीय निगरानी में एआई के इस्तेमाल को रेखांकित किया। अर्थशास्त्र विभाग, बीएचयू के विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार भट्ट भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. जेबी कोमारैया ने बताया कि यह ऊर्जा अर्थशास्त्र पाठ्यक्रम का वार्षिक आयोजन है। इनमें भविष्य की ऊर्जा मांग एवं आर्थिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा अर्थशास्त्र एवं बाजार परिवर्तन जैस विषय शामिल हैं।
आईआईटी कानपुर के प्रो. अनूप सिंह ने जलवायु परिवर्तन और उत्सर्जन से संबंधित वैज्ञानिक समझ को प्रभावी कार्रवाई में बदलने की जरूरत बताई। केवीए इंजीनियर्स एंड कंसल्टेंट्स के प्रबंध निदेशक डॉ. विजय कुमार ने जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को ठोस कार्यों में बदलने पर जोर दिया। आईआईटी बीएचयू के विद्युत अभियांत्रिकी विभागाध्यक्ष प्रो. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि अर्थशास्त्र और विद्युत अभियांत्रिकी के बीच सहयोग विभिन्न क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक साथ लाने का अवसर प्रदान करता है। उद्घाटन सत्र में बुक ऑफ एब्स्ट्रैक्ट्स और प्लेसमेंट ब्रोशर का विमोचन भी किया गया। सत्र का समापन पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के पर्यावरण अध्ययन विभाग की सह-संयोजक डॉ. सुमन मोर के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।
सौर ऊर्जा और सतत विकास पर स्मृति व्याख्यान
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में डॉ. आर. सुब्रमण्यम स्मृति व्याख्यान हुआ। आईआईटी (बीएचयू) के पूर्व निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने सौर ऊर्जा, मानव विकास और सतत विकास लक्ष्यों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से सतत विकास लक्ष्य-7 यानी सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा पर चर्चा की। अध्यक्षता प्रो. बीवी सिंह ने की, जबकि प्रो. हरिकेश सिंह विशिष्ट अतिथि रहे। प्रो. हरिकेश सिंह ने संसाधनों के उपयोग से जुड़े सवालों के समाधान में अर्थशास्त्र की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। दिवंगत डॉ. आर सुब्रमण्यम के पुत्र कर्नल ईशान भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने जो आधार तैयार किया था, उसी पर आज भी उनकी विरासत आगे बढ़ रही है।