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ठंड में गरमाया मिनी सदन का पारा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sun, 20 Dec 2015 01:46 AM IST
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जलकल विभाग किसके अधीन है, इस सवाल पर शनिवार को नगर निगम मिनी सदन में हंगामा मच गया। पांच घंटे चली बैठक में इस मुद्दे ने मिनी सदन का तापमान अचानक बढ़ा दिया।
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दरअसल, जलकल विभाग के पुनरीक्षित बजट पेश नहीं करने पर नाराज पार्षदों ने कार्रवाई की मांग की। सभापति मेयर रामगोपाल मोहले ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जलकल के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश नगर आयुक्त को दिया।
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नगर आयुक्त के यह कहने पर कि जलकल विभाग नगर निगम के अधीन है या स्वतंत्र, यह स्पष्ट नहीं है, पार्षद हंगामे पर उतर आए। वे सदन में इसे स्पष्ट करने की मांग पर अड़ गए।
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शोरशराबे के बीच जमकर नोकझोंक हुई। वर्ष 2008 के पहले और उसके बाद के जलकल से जुड़े शासनादेशों को सदन में प्रस्तुत करने की मांग की।
नगर आयुक्त ने इसके लिए तीन दिन की मोहलत मांगी और भरोसा दिलाया कि इस समयावधि के भीतर शासनादेश की प्रतियां सभी पार्षदों को मुहैया करा दी जाएगी।
इस बीच, नगर निगम के आय-व्यय के मूल बजट 68068.10 के सापेक्ष 77972.85 लाख का पुनरीक्षित बजट सदन में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
मिनी सदन की कार्यवाही 12 बजे जैसे ही शुरू हुई, सपा पार्षद अमरदेव यादव ने जलकल विभाग की ओर से पुनरीक्षित बजट पेश नहीं करने का मुद्दा उठाया।
भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के पार्षदों ने भी बजट प्रस्तुत नहीं करने पर कड़ी आपत्ति जताई। जलकल के महाप्रबंधक ने सदन में अपनी बात रखी लेकिन सदन उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ।
नाराज पार्षदों ने कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। सीताराम केशरी ने कहा कि जलकल से काम करने के लिए कहा जाता है तो जवाब मिलता है कि धन नहीं है और अब बजट ही नहीं प्रस्तुत किया गया।
महापौर रामगोपाल मोहले ने भी इसे जलकल की गंभीर त्रुटि माना और नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही को निर्देश दिया कि जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कर इससे सदन और शासन को अवगत कराएं।
नगर आयुक्त ने भी माना कि गलती हुई है और वह स्पष्टीकरण तलब करेंगे लेकिन उनके यह कहने पर कि अभी शासन स्तर से यह स्पष्ट ही नहीं है कि जलकल विभाग स्वतंत्र है या फिर नगर निगम में, हंगामा खड़ा हो गया।
सदन में पार्षद इसे स्पष्ट कराने की मांग पर अड़ गए। बता दें कि 2008 से पहले यह जलसंस्थान के तौर नगर निगम के तहत था। इसके बाद जलकल विभाग बना दिया गया और अधिकार बढ़ा दिए गए। उसके बाद से निगम प्रशासन की ही निगरानी में यह विभाग काम कर रहा है।