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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Annual adornment Goddess Kushmanda confluence Goddess melody rhythm tempo featuring Banarasi saree

मां कूष्मांडा का वार्षिक शृंगार: बनारसी साड़ी व लाल चुनरी से मां, स्वर, लय व ताल का संगम; जुटे 21 कलाकार

Thu, 10 Sep 2026 11:53 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 10 Sep 2026 11:53 PM IST
सार

वाराणसी में मां कूष्मांडा का वार्षिक शृंगार बनारसी साड़ी और लाल चुनरी से किया गया। संगीत महोत्सव की अंतिम निशा में स्वर, लय और ताल का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में 21 कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से मां के दरबार में भक्ति और संगीत की छटा बिखेरी। श्रद्धालुओं ने देर रात तक आयोजन का आनंद लिया।

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Annual adornment Goddess Kushmanda confluence Goddess melody rhythm tempo featuring Banarasi saree
काशी में मां कूष्मांडा का वार्षिक शृंगार। - फोटो : संवाद

विस्तार

भगवती मां कूष्मांडा के तीन दिवसीय वार्षिक शृंगार व संगीत महोत्सव की विराम निशा में बृहस्पतिवार को स्वर्ण-जवाहर से मां की दमकती छवि को निहारने के लिए भक्तों का हुजूम उमड़ा था। भक्तों के मां के जयकारे, घंटा-घड़ियाल की अनुगूंज के बीच कला साधकों के सुर, लय व ताल से आराधना होती रही। पूर्वांचल के 21 कलाकारों ने लोकगीतों से मां के धाम में हाजिरी लगाई।

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दुर्गाकुंड स्थित मां कूष्मांडा के दरबार में शाम से ही मां के शृंगार से लेकर स्वर साधना शुरू हो गई। मंदिर महंत पं. कौशलपति द्विवेदी, पं. संजय दुबे के सानिध्य में मां का पंचामृत स्नान कराकर बनारसी लाल साड़ी और लाल चुनरी से सुसज्जित किया गया। 

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कोलकाता से मंगाए गए गुलाब और रजनीगंधा के फूलों से मां को सजाया गया। मांगटीका, नथिया, स्वर्ण मुकुट और विशेष फाटा हार के साथ स्वर्ण-रजत युक्त मोती की लड़ियों से मां का अप्रतिम शृंगार हुआ। विविध नैवेद्य, फल, मिष्ठान व पकवानों का भोग लगाकर आरती हुई। इसके बाद मंदिर का कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिया गया। दर्शन का क्रम देर रात तक चला।

संगीत समारोह में प्रख्यात भजन गायक गोपाल राय, विजय कपूर, जौनपुर की भावना सिंह, कल्पना सिंह, विदुषी वर्मा, करिश्मा पांडेय, पीयूष मिश्र, ज्योति माही, पवन परदेशी, ममता शर्मा, नियति वर्मा, प्रियंका पांडेय, अंजली ऊर्वशी आदि कलाकारों ने मां की स्वराधना की। 

उन्होंने जय दुर्गे दुर्गति परिहारिणी..., अम्बे चरण कमल है तेरे..., कैसे नाही इठलाऊं मेरी मईया है आयी..., लहरे लाहरदरवा कोहरवा... आदि देवी गीत और पचरा सुनाकर मां के चरण पखारे। संगत कलाकारों में तबले पर मोतीलाल शर्मा, ढोलक पर सोनू, कीबोर्ड पर नीरज, रामाश्रय, शिवांश, पैड पर राहुल, बैंजो पर जियाराम रहे। कलाकारों का स्वागत कौशलपति द्विवेदी, बिंदु दुबे, सोनू झा तथा संयोजन एवं संचालन प्रभुनाथ राय दाढ़ी ने किया।

Annual adornment Goddess Kushmanda confluence Goddess melody rhythm tempo featuring Banarasi saree
आयोजन में प्रस्तुति देतीं कलाकार। - फोटो : संवाद

12 घंटे चला भंडारा, 15 हजार से अधिक ने ग्रहण किया प्रसाद
शृंगार महोत्सव के अंतिम दिन मंदिर परिसर में अखंड भंडारा 12 घंटे चला, जो दोपहर 12 बजे मां की भोग आरती के बाद शुरू हुआ और रात 12 बजे तक अनवरत चला। पं. विशेश्वर झा सोनू ने बताया कि इस अखंड भंडारे में 15 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मां के भोग प्रसाद को ग्रहण करने के लिए दोपहर से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही, जो देर रात तक चलती रही।

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