फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   freedom fighter Ramprasad Bismil birth anniversary relationship with varanasi and kashi vidyapeeth 

आजादी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती आज, काशी से है क्रांति का रिश्ता

Thu, 11 Jun 2020 05:54 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 11 Jun 2020 05:54 PM IST
सार

  • आजादी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल की आज जंयती।
  • काशी से हुआ था काकोरी कांड का सूत्रपात, काशी से क्रांति का रिश्ता था बिस्मिल का।
  • आंदोलन के सिलसिले में अक्सर आना होता था वाराणसी, काशी विद्यापीठ हुआ करता था आंदोलनकारियों का ठिकाना।

विज्ञापन
freedom fighter Ramprasad Bismil birth anniversary relationship with varanasi and kashi vidyapeeth 
आजादी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरफरोशी की तमन्ना रखने वाले आजादी के नायक रामप्रसाद बिस्मिल आज भी दुनिया के लिए मिसाल हैं। आज उनकी जयंती पर जहां पूरा देश उनको नमन कर रहा है, वहीं काशी भी उनसे अपने रिश्तों को टटोल रही है। आजादी की लड़ाई में काशी क्रांतिकारियों का केंद्र बिंदु था। इतिहासकारों की मानें तो काकोरी कांड का सूत्रपात भी काशी से ही हुआ था। काकोरी कांड के नायक रामप्रसाद बिस्मिल ही थे।

विज्ञापन

काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त प्रोफेसर सतीश राय का कहना है कि क्रांति के दौर में पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र क्रांति का केंद्र हुआ करते थे। वहीं बनारस बंगाल और महाराष्ट्र के बीच सेतु की तरह था। क्रांतिकारी आंदोलन की रूपरेखा तय करने के लिए रामप्रसाद बिस्मिल जी का अक्सर काशी आना हुआ करता था। उस दौर में क्रांतिकारियों के छिपने का ठिकाना काशी विद्यापीठ हुआ करता था।
विज्ञापन



रास बिहारी बोस, शचींद्र नाथ सान्याल, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों के सानिध्य में कई क्रांतिकारी गतिविधियों का काशी में ही सूत्रपात हुआ। इसमें सबसे खास रहा काकोरी कांड। 1897 में आज के ही दिन यानी 11 जून को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में माता मूलारानी और पिता मुरलीधर के पुत्र के रूप में जन्मे थे क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल। अंग्रेजों ने ऐतिहासिक काकोरी कांड में मुकदमे के नाटक के बाद 19 दिसंबर 1927 को उन्हें गोरखपुर की जेल में फांसी पर चढ़ा दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

freedom fighter Ramprasad Bismil birth anniversary relationship with varanasi and kashi vidyapeeth 
प्रो सतीश राय।

प्रो राय का कहना है कि चौरीचौरा कांड के बाद अचानक असहयोग आंदोलन वापस ले लिया गया तो इसके कारण देश में फैली निराशा को देखकर बिस्मिल का कांग्रेस के आजादी के अहिंसक प्रयत्नों से मोहभंग हो गया। फिर तो नवयुवकों की क्रांतिकारी पार्टी का अपना सपना साकार करने में बिस्मिल ने चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाले हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के साथ गोरों के सशस्त्र प्रतिरोध का नया दौर आरंभ किया लेकिन सवाल था कि इस प्रतिरोध के लिए शस्त्र खरीदने को धन कहां से आए। काकोरी कांड का सूत्रपात काशी में हुआ और अक्सर बिस्मिल जी एसोसिएशन की बैठक के लिए आते रहते थे।

काशी विद्यापीठ में ही आंदोलन और क्रांति से जुड़ी बैठकें हुआ करती थीं। 1920 के दशक में क्रांतिकारी आंदोलन की धुरी था बनारस। रास बिहार बोस बमकांड के जब भूमिगत हुए तो वह काफी समय तक बनारस में रहे। इसलिए क्रांतिकारियों के आने का सिलसिला अक्सर होता था। पं. कमलापति त्रिपाठी जी ने भी कई बार इस बात का जिक्र किया था कि क्रांतिकारी गतिविधियों की रणनीतियां काशी में ही तय होती थीं।

freedom fighter Ramprasad Bismil birth anniversary relationship with varanasi and kashi vidyapeeth 
अमिताभ भट्टाचार्य।

वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ भट्टाचार्य का कहना है कि बहुत कम ही लोग जानते हैं कि इस सरफरोश क्रांतिकारी के बहुआयामी व्यक्तित्व में संवेदशील कवि, शायर, साहित्यकार व इतिहासकार के साथ एक बहुभाषाभाषी अनुवादक भी था। बिस्मिल के अलावा दो और उपनाम थे राम और अज्ञात। 30 साल के जीवनकाल में उनकी 11 पुस्तकें प्रकाशित हुईं। जिनमें से एक भी गोरी सत्ता के कोप से नहीं बच सकीं और सारी की सारी जब्त कर ली गईं। वह दुनिया के ऐसे पहले क्रांतिकारी थे जिसने क्रांति के लिए हथियार अपनी लिखी पुस्तकों की बिक्री से मिले रुपयों से खरीदे थे।

अमर शहीद बिस्मिल के जीवन पर शोध करने वाले पूर्व पीपीएस विद्यार्णव शर्मा के अनुसार किशोरावस्था में ही वे रामप्रसाद बिस्मिल आर्यसमाज के संपर्क में आ गए थे। शाहजहांपुर में आर्यकुमार सभा की स्थापना की। सत्यार्थप्रकाश और स्वामी दयानंद सरस्वती की जीवनी का गहन अध्ययन किया और बहुत प्रभावित हुए वेदाध्ययन के उपरांत प्रकांड वेद ज्ञाता होकर पण्डित कहलाए जाने लगे। सदर आर्यसमाज शाहजहांपुर में ही निवास करने लगे।

freedom fighter Ramprasad Bismil birth anniversary relationship with varanasi and kashi vidyapeeth 
विद्यार्णव शर्मा (पूर्व पुलिस उपाधीक्षक यूपी पुलिस)।

यहीं से सामाजिक एवं क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन करने लगे। युवावस्था से पूर्व ही उनका जुड़ाव तत्कालीन सशस्त्र क्रांतिकारियों से हो गया। क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित के संपर्क में आए और खुलकर स्वाधीनता संग्राम में आ गए। मैनपुरी षड़यंत्र केस के बाद शाहजहांपुर लौट आए और उपनाम बिस्मिल के नाम से विख्यात हो गए।

स्वतन्त्रता संग्राम के इतिहास में जोड़ा नया अध्याय :
स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में नया अध्याय जोड़ने वाले महान क्रांतिकारी प राम प्रसाद "बिस्मिल" का जन्म 11 जून 1897 को  शाहजहांपुर नगर के मोहल्ला खिरनीबाग में हुआ, मूल रूप से इनके पूर्वज ग्वालियर के चंबल नदी किनारे ग्राम तोमरघार के निवासी थे। अकाल के कारण उनका परिवार शाहजहांपुर आ बसा।

निर्धन परिवार ऊपर से दुर्भिक्ष की आपदा परिवार के पास खाने तक को नहीं था। बहुत कोशिश के बाद तीन रुपये माह के वेतन पर इनके दादा नारायण लाल को अत्तार की दुकान पर नोकरी मिल गई। परिवार का इसमें गुजारा संभव न था। इनकी दादी ने घरों में काम की तलाश की, लेकिन दादी को लोग इस भय से काम न देते कि कहीं बुढ़िया मुट्ठी भर अनाज न खा ले। बहुत अनुनय विनय के बाद दादी को  घरों में चक्की पर आटा पिसाई का काम मिलता, आधा पेट भोजन कर किसी तरह परिवार का जीवन यापन होता रहा।

दुर्भिक्ष के दिन समाप्त हुए पिता मुरलीधर को 15 रुपये मासिक पर नगर पालिका में नोकरी लग गई l इनकी माँ मूलमती बहुत धर्मनिष्ठ थी, बाल्यकाल से ही उन्होंने राम प्रसाद को सुदृढ़ स्वास्थ्य बनाने एवं सचरित्र  रहने की शिक्षा दी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed