स्वतंत्रता सेनानी बोले- भारत माता की जय बोलने पर होती थी पिटाई, फिर भी अंग्रेजों को खदेड़कर माने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'अंग्रेजो भारत छोड़ो' का नारा लगाने पर लाल पगड़ी वाले सिपाहियों ने खूब पिटाई की थी। यहां तक की 'भारत माता की जय' बोलने वालों को भी पीटा गया। बिहार के मुजफ्फरपुर थाने में झंडा फहराने के दौरान मुझे और साथियों को गिरफ्तार कर मोतिहारी जेल में बंद कर दिया गया था। यह कहना है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बिरेंद्र कुमार मुखर्जी (93) का।
बिरेंद्र कुमार मुखर्जी ने कहा कि जब भी स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस का दिन आता है तो अंग्रेजी हुकुमत का वो खौफ याद आता है, लेकिन हम लोगों ने भी हार नहीं मानी और उन्हें खदेड़कर ही माने। अतीत में जाते ही लाल पगड़ी का खौफ आज भी साफ दिखाई देता है।
ये भी पढ़ें : सोनभद्र : उभ्भा गांव पहुंचीं प्रियंका गांधी, पीड़ित परिजनों के साथ बैठकर जान रहीं उनका हालचाल
चौदह वर्ष की अवस्था में ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अंग्रेजो भारत छोड़ो के नारे से प्रेरित होकर आजादी की लड़ाई लड़ने वाले मुखर्जी इस समय विनायका स्थित कल्पतरु अपार्टमेंट में अपनी पत्नी कविता बनर्जी के साथ रहते हैं। एक बेटा है, जो अमेरिका में रहता है। उन्होंने बताया कि उस समय जब गांव में कोई व्यक्ति अपराध करता था तो अंग्रेज आकर गांव के पुरुषों-महिलाओं पर अत्याचार करते थे।
14 वर्ष की उम्र में मुजफ्फरपुर के एक थाने में 1942 में झंडा फहराने के लिए इकठ्ठे हुए थे कि अंग्रेजों को भनक लग गई। पुलिस आकर कई लोगों को पकड़ कर ले गई। डेढ़ वर्ष तक मोतिहारी जेल में बंद रहने के दौरान भारत माता की जय के नारे लगाने पर भी पिटाई होती थी।
ये भी पढ़ें : सावन के अंतिम सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचे डिप्टी सीएम, ढाई लाख भक्तों ने लगाई हाजिरी
उन्होंने बताया कि आजादी का जुनून है कि आज भी कोई बुलाए न बुलाए, 15 अगस्त को कलेक्ट्रेट में जाकर झंडारोहण में शामिल होते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए बिरेंद्र मुखर्जी कहते हैं कि इच्छाशक्ति के चलते अनुच्छेद 370 को हटाया जा सका, जो बहुत ही अच्छा हुआ।