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यूपीः सरकार से फंड दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी, हड़पे 63 लाख
Wed, 16 Jan 2019 12:57 AM IST
shashikant misra
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जौनपुर
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,जौनपुर
Published by: shashikant misra
Updated Wed, 16 Jan 2019 12:57 AM IST
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यूपी के जौनपुर में अमन सोशल डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन के निदेशक मेंहदी हसन समीन रिजवी के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया गया है। उन पर देवरिया जिले के 15 शिक्षण संस्थानों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार से फंड दिलाने के नाम पर 63 लाख रुपये से अधिक हड़पने का आरोप है। लेनदेन में उन्होंने संस्थाओं को फर्जी चेक भी दिए थे।
देवरिया जिले के बघौचघाट थाना क्षेत्र के हड़फोड़ा निवासी व उम्मे कुलसुम एजुकेशनल एवं चैरिटेबल सोसाइटी के प्रबंधक मो. खुर्शीद आलम खान का आरोप है कि जौनपुर के बारह दौरिया निवासी मेंहदी हसन समीन रिजवी ने उनको अपनी संस्था का गोरखपुर का मैनेजर बनाया और बताया कि उनकी संस्था मानव संसाधन विकास मंत्रालय से शिक्षण संस्थानों को फंड दिलाती है।
वित्तीय सहायता दिलाने के लिए रुपयों की मांग की गई। इस पर 20 जनवरी से तीन नवंबर 2015 तक 16 संस्थानों ने रिजवी और उनकी संस्था के बैंक खाते में 63 लाख छह हजार रुपये जमा कराए। रिजवी मो. खुर्शीद को छह महीने तक उन्हें वेतन भी देता रहा। उसके बाद वेतन बंद कर दिया।
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शिक्षण संस्थानों ने रुपये लौटाने के लिए दबाव बनाया तो उसने सबको फर्जी हस्ताक्षर से चेक जारी कर दिए। इसकी शिकायत पर पीड़ितों को धमकी मिलने लगी कि उनके हस्ताक्षर स्टांप पेपर पर कराए गए हैं, उन पर कुछ भी लिखकर केस करा दिया जाएगा। स्कूल संचालकों ने एसपी को प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली में केस दर्ज किया गया।
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देवरिया जिले के बघौचघाट थाना क्षेत्र के हड़फोड़ा निवासी व उम्मे कुलसुम एजुकेशनल एवं चैरिटेबल सोसाइटी के प्रबंधक मो. खुर्शीद आलम खान का आरोप है कि जौनपुर के बारह दौरिया निवासी मेंहदी हसन समीन रिजवी ने उनको अपनी संस्था का गोरखपुर का मैनेजर बनाया और बताया कि उनकी संस्था मानव संसाधन विकास मंत्रालय से शिक्षण संस्थानों को फंड दिलाती है।
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वित्तीय सहायता दिलाने के लिए रुपयों की मांग की गई। इस पर 20 जनवरी से तीन नवंबर 2015 तक 16 संस्थानों ने रिजवी और उनकी संस्था के बैंक खाते में 63 लाख छह हजार रुपये जमा कराए। रिजवी मो. खुर्शीद को छह महीने तक उन्हें वेतन भी देता रहा। उसके बाद वेतन बंद कर दिया।
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शिक्षण संस्थानों ने रुपये लौटाने के लिए दबाव बनाया तो उसने सबको फर्जी हस्ताक्षर से चेक जारी कर दिए। इसकी शिकायत पर पीड़ितों को धमकी मिलने लगी कि उनके हस्ताक्षर स्टांप पेपर पर कराए गए हैं, उन पर कुछ भी लिखकर केस करा दिया जाएगा। स्कूल संचालकों ने एसपी को प्रार्थनापत्र दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली में केस दर्ज किया गया।