यूपी: इंटरनेशनल कॉल को लोकल में बदलकर ठगी करने वाला नेटवर्क पकड़ा, दो गिरफ्तार; छह सिम बॉक्स बरामद
वाराणसी में इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल में बदलकर ठगी करने वाले नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। टीम ने एक साथ तीन ठिकानों पर छापेमारी कर 192 सिम स्लॉट वाले छह सिम बॉक्स बरामद किए। इस नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल की पहचान छिपाकर अवैध तरीके से लोकल कॉल कराई जा रही थी।
विस्तार
साइबर क्राइम सेल, प्रतिबिंब टीम और चितईपुर पुलिस ने बुधवार को शहर में सक्रिय सिम बॉक्स नेटवर्क का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान चौक थाना क्षेत्र के सराय हरहा निवासी मोहम्मद आबिद और दारानगर के नवापुरा निवासी शशि शेखर सिंह के रूप में हुई है। वहीं, लखनऊ निवासी एक अन्य आरोपी सौगात अस्थाना की तलाश जारी है।
डीसीपी साइबर क्राइम नीतू कादयान ने बताया कि पुलिस ने शिवपुर, लंका और चितईपुर थाना क्षेत्रों में किराये के तीन ठिकानों पर छापेमारी कर छह सिम बॉक्स समेत बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए। जांच में सामने आया कि पुणे में डिजिटल अरेस्ट कर 25 लाख रुपये की ठगी की गई थी। ठगी की रकम एक आरोपी के खाते में आई थी।
पुलिस ने की कार्रवाई
पुलिस ने अशोकपुरम कॉलोनी, एकता नगर (शिवपुर), बालाजी भवन, सामनेघाट (लंका) और कैलाशपुरी कॉलोनी (चितईपुर) स्थित ठिकानों से छह 32-पोर्ट सिम बॉक्स बरामद किए। इनमें कुल 192 सिम कार्ड स्लॉट और उनसे जुड़े 192 एंटीना लगे थे। इसके अलावा चार सिम बॉक्स अडैप्टर, विभिन्न कंपनियों के राउटर और गेटवे, तीन टीपी-लिंक वायरलेस राउटर, तीन ओमाडा वीपीएन गेटवे, तीन वाई-फाई कैमरे और चार मोबाइल फोन बरामद हुए।
मौके से 190 अतिरिक्त एंटीना, 10 अडैप्टर, तीन ऑप्टिकल फाइबर केबल और छह ईथरनेट केबल भी मिलीं। मामले में चितईपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने बताया कि वे ठगी की रकम को खपाने का माध्यम थे। वे सीधे पैसा नहीं लेते थे, बल्कि साइबर अपराधियों तक रकम पहुंचाने में मदद करते थे।
खंगाले जा रहे आपराधिक रिकाॅर्ड
इसके लिए वे सिम बॉक्स का इस्तेमाल करते थे, जिनमें एक साथ कई सिम कार्ड लगाए जा सकते हैं। ये उपकरण इंटरनेट आधारित वॉयस कॉलिंग यानी वीओआईपी और मोबाइल नेटवर्क के बीच संपर्क स्थापित करने में सक्षम होते हैं। इनके जरिये इंटरनेट से आने वाली कॉल को मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से आगे भेजा जा सकता है। इसी तरह मोबाइल नेटवर्क से आने वाली कॉल को इंटरनेट आधारित नेटवर्क तक पहुंचाया जा सकता है।
आरोपी कई सिम स्लॉट वाले बॉक्स में अलग-अलग मोबाइल ऑपरेटरों के सिम कार्ड लगाते थे और इनके जरिये बड़ी संख्या में कॉल करते थे। खासकर बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, सरकारी कर्मचारी या किसी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। - नीतू कादयान, डीसीपी साइबर क्राइम
अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय कॉल की तरह दिखाना
सिम बॉक्स फ्रॉड के कुछ मामलों में इंटरनेट के माध्यम से आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉल को स्थानीय मोबाइल नेटवर्क के जरिये भेजा जाता है। साइबर सेल अब सिम कार्ड की पहचान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), इंटरनेट कनेक्शन, आईपी एड्रेस, डिजिटल लॉग, उपकरणों से जुड़े कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान और संदिग्ध बैंक खातों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय तो नहीं है।