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नवरात्र का चौथा दिनः मां कुष्मांडा के दरबार में उमड़ा भक्तों का सैलाब, स्वर्ण श्रृंगार ने मन मोहा

Fri, 12 Apr 2024 08:43 AM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 12 Apr 2024 08:43 AM IST
सार

Varanasi News: देवी कुष्मांडा के दरबार में सुबह से भक्तों का जमावड़ा उमड़ पड़ा। कतारबद्ध होकर भक्तों ने मां का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान परिसर के आस-पास फूल-माला बेचने वालों की भी काफी भीड़ रहीं।

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Fourth day of Navratri in varanasi devotees worship Maa Kushmanda
मां कुष्मांडा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नवरात्र का आज चौथा दिन है। इस दिन देवी कुष्मांडा का पूजन होता है। वाराणसी के दुर्गाकुंड स्थित मां कुष्मांडा के दर्शन के लिए आज भोर से ही भक्त कतारबद्ध हो गए थे। विधि-विधान से पूजन-

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अर्चन के बाद भक्तों ने दान-पुण्य किया। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रही।

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आज चौथे दिन मां कुष्मांडा का भव्य श्रृंगार भी किया गया था। मां की अलौकिक छटा का देख भक्त निहाल हो उठे। मां से लोग संतान प्राप्ति की कामना करते हैं।

ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने वाली
माँ कूष्मांडा सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदि शक्ति हैं। अपनी मंद, हल्की हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था,चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार परिव्याप्त था, तब इन्हीं देवी ने अपने 'ईषत' हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व नहीं था।
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मां कूष्माण्डा की पूजाविधि
देवी कूष्मांडा की पूजा में कुमकुम, मौली, अक्षत, पान के पत्ते, केसर और शृंगार आदि श्रद्धा पूर्वक चढ़ाएं। सफेद कुम्हड़ा या कुम्हड़ा है तो उसे मातारानी को अर्पित कर दें, फिर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और अंत में घी के दीप या कपूर से मां कूष्मांडा की आरती करें।

मां कूष्मांडा का प्रिय भोग
मां कूष्मांडा को पूजा के समय हलवा, मीठा दही या मालपुए का प्रसाद चढ़ाना चाहिए और इस भोग को खुद तो ग्रहण करें ही साथ ही ब्राह्मणों को भी दान देना चाहिए।

देवी का प्रार्थना मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

देवी कूष्माण्डा का बीज मंत्र-
ऐं ह्री देव्यै नम:

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