भाजपा नेता और पुलिसकर्मियों के बीच हाथापाई के मामले में इंस्पेक्टर समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड
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वाराणसी में शुक्रवार को भाजपा नेता और पुलिस के बीच हाथापाई के मामले में चार पुलिसकर्मी सस्पेंड हो गए हैं। इस मामले में रविवार को एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि सीओ भेलूपुर प्रीति त्रिपाठी पुलिस ऑफिस से संबद्ध, लंका इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी, दरोगा सुनील गौड़ और राजू व दो सिपाही निलंबित किए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 10 बजे भाजपा नेता और पुलिस से सुन्दरपुर सट्टी के पास हाथापाई में हुई। जिसमें लंका पुलिस ने भाजपा नेता व जिला पंचायत सदस्य सुरेंद्र पटेल व भाई वीरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया था। इस दौरान भाजपा नेता के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
शनिवार को मुकदमे से कई धाराएं हटाए जाने के बाद अपर जिला जज प्रथम प्रदीप कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी भाजपा नेता सुरेंद्र पटेल और उनके भाई अधिवक्ता वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बिंदू की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली थी।
सुंदरपुर चौकी इंचार्ज सुनील गौड़ के अनुसार, शुक्रवार की रात 10 बजे एक शिकायत के आधार पर फैंटम दस्ते के दो सिपाही सुंदरपुर सब्जी मंडी के समीप गए थे। इस दौरान अचानक काशी विद्यापीठ छात्रसंघ का पूर्व अध्यक्ष विकास पटेल अपने साथियों के साथ मौके पर आया और सिपाहियों से उलझकर शिकायतकर्ता को धमकाने लगा।
सिपाहियों के बुलाने पर दरोगा भी वहां पहुंचे। तब तक विकास के बुलाने पर उसके पिता सुरेंद्र और अन्य लोग मौके पर आ गए। इसके बाद सभी दरोगा और सिपाहियों को घसीट कर अपने घर के पास ले गए और मारपीट कर उनकी वर्दी फाड़ कर सोने की चेन छीन लिए। दरोगा सुनील की तहरीर के आधार पर लंका थाने में बीजेपी नेता सुरेंद्र, उनके बेटे विकास सहित सात नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ 19 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
शनिवार को मुकदमे से हत्या का प्रयास, लूट और अपहरण की धाराएं हटाए जाने के बाद अपर जिला जज प्रथम प्रदीप कुमार सिंह की अदालत ने आरोपी भाजपा नेता सुरेंद्र पटेल और उनके भाई अधिवक्ता वीरेंद्र प्रताप सिंह उर्फ बिंदू की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। आरोपियों का पक्ष अदालत में अधिवक्ता अनुज यादव ने रखा। वहीं, इस प्रकरण की जांच अब सीओ भेलूपुर प्रीति त्रिपाठी को सौंप दी गई है।
एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया कि वीडियो क्लिप देखी गई। उसमें अपहरण, लूट और हत्या के प्रयास की पुष्टि नहीं हुई। दरोगा की तहरीर में भी कुछ भ्रमात्मक बातें है, जैसे कि रात 10 बजे दुकानों के शटर धड़ाधड़ गिरने लगे। इसलिए हत्या का प्रयास, लूट और अपहरण की धारा हटा ली गई हैं। किसी के भी प्रति हम गलत तरीके से कार्रवाई के लिए इजाजत नहीं दे सकते हैं, जो सही है, उसी के आधार पर कार्रवाई होगी।