यूपी: पराली जलाने के मामले में सामने आई चार लेखपालों की लापरवाही, तहसीलदार ने किया सस्पेंड
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प्रशासन प्रदूषण रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है, तो वहीं प्रदूषण फैलने पर कार्रवाई भी सख्त कर दी है। इसमें पराली जलाने पर प्रशासन ज्यादा सख्त बरत रहा है। इसी के चलते मऊ जिले के मधुबन तहसीलदार ने सोमवार को किसानों की तरफ से पराली जलाने के मामले में लापरवाही बरतने पर चार लेखपालों को निलंबित कर दिया है। जिसे लेकर विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
मधुबन तहसील क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर धान की खेती की जाती है। कंबाइन मशीन के बढ़ते चलन से किसान जानकारी के अभाव में पराली जला रहे हैं। पराली जलाने पर अंकुश लगाने के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित की गई है। खेतों में पराली जलाने वाले किसानों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
पराली जलाने के चलते खेतों में मित्र कीट भी मर रहे हैं। जिससे खेतों की उर्वरा शक्ति लगातार कम होती जा रही है। तहसीलदार मधुबन सुबाष चंद्र यादव ने पराली जलाने के मामले में मानीटरिंग की तो लेखपालों की शिथिलता उजागर हुई।
तहसीलदार ने तहसील के आलापुर के लेखपाल शरदचंद पांडेय, तिघरा के रामभवन यादव, गजियापुर के आशुतोष पांडेय और नंदौर के लेखपाल ज्ञानचंद भारती से पराली जलाने के मामले में रिर्पोट तलब की। लेकिन उन्होंने निर्धारित समय के अंदर अपनी रिपोर्ट तहसील कार्यालय को नहीं सौंपी।
मामले को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार ने चारों लेखपालों को निलंबित कर दिया। निलंबन के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति है। इस बाबत तहसीलदार मधुबन सुबाष चंद्र यादव का कहना है कि कार्य में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।