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धर्मसंघ में एक साथ जले इकतालिस हजार छह सौ दस दीप
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धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज की तपोस्थली धर्मसंघ सोमवार को दीपों के प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठी। करपात्र प्राकट्योत्सव की पूर्व संध्या पर करपात्र दीपावली का नजारा हर किसी को बरबस ही अपनी तरफ खींच रही थी। जैसे ही इकतालिस हजार छह सौ दस दीये एक साथ प्रज्ज्वलित किया गया, पूरा परिसर दीयों की रोशनी से नहा उठा।
सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल में चल रहे पंच दिवसीय 114 वें करपात्र प्राकट्योत्सव पर गोधूलि बेला में मणि मंदिर व पूरे परिसर को सजाया गया। मुख्य द्वार से लगायत संपूर्ण प्रांगण में विद्युत झालरों एवं दीपकों की भी आकर्षक सजावट की गई थी। सर्वप्रथम धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज एवं पं. जगजीतन पांडेय ने मणि मंदिर के मुख्य सभागार में स्वस्तिवाचन के बीच प्रथम दीपक प्रज्ज्वलित किया।
धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रम्हचारी महाराज ने बताया कि आज के दिन हम स्वामी करपात्री जी महाराज के इस धरती पर अवतरित हुए दिनों के बराबर दीपदान कर उन्हें नमन करते हैं। दीपदान कर हम विश्व के कल्याण एवं कोरोना महामारी से संपूर्ण विश्व की रक्षा की कामना करते हैं।
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सजाई गई रंगोली
करपात्र दीपावली के अवसर पर रंगोली भी सजाई गई थी। मुख्य द्वार पर सुस्वागतम की रंगोली बेहद मनमोहक रही, उसके अलावा मणि मंदिर के चारों स्तंभों पर कमल पुष्प की रंगोली, हॉल के मध्य में विशाल कलश की रंगोली तथा चारों और सनातनी प्रतीक चिन्ह के ओम तथा स्वास्तिक तथा फूलों से धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जैसे धर्मवाक्य आकर्षण का केंद्र रहे।
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सोमवार को दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ शिक्षा मंडल में चल रहे पंच दिवसीय 114 वें करपात्र प्राकट्योत्सव पर गोधूलि बेला में मणि मंदिर व पूरे परिसर को सजाया गया। मुख्य द्वार से लगायत संपूर्ण प्रांगण में विद्युत झालरों एवं दीपकों की भी आकर्षक सजावट की गई थी। सर्वप्रथम धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी महाराज एवं पं. जगजीतन पांडेय ने मणि मंदिर के मुख्य सभागार में स्वस्तिवाचन के बीच प्रथम दीपक प्रज्ज्वलित किया।
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धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रम्हचारी महाराज ने बताया कि आज के दिन हम स्वामी करपात्री जी महाराज के इस धरती पर अवतरित हुए दिनों के बराबर दीपदान कर उन्हें नमन करते हैं। दीपदान कर हम विश्व के कल्याण एवं कोरोना महामारी से संपूर्ण विश्व की रक्षा की कामना करते हैं।
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सजाई गई रंगोली
करपात्र दीपावली के अवसर पर रंगोली भी सजाई गई थी। मुख्य द्वार पर सुस्वागतम की रंगोली बेहद मनमोहक रही, उसके अलावा मणि मंदिर के चारों स्तंभों पर कमल पुष्प की रंगोली, हॉल के मध्य में विशाल कलश की रंगोली तथा चारों और सनातनी प्रतीक चिन्ह के ओम तथा स्वास्तिक तथा फूलों से धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जैसे धर्मवाक्य आकर्षण का केंद्र रहे।