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पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी को न्यायिक अभिरक्षा में गुजारने पड़े चार घंटे
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बलिया। लगभग 11 वर्ष पहले फेफना चौराहे पर रास्ता अवरुद्ध कराने के मामले में जारी गैर जमानती वारंट के मामले में प्रदेश के पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता उपेंद्र तिवारी को चार घंटे न्यायिक अभिरक्षा में रहना पड़ा।
गत 29 अप्रैल 2011 को फेफना चौराहे पर जाम लगाने के मामले में एसआई की तहरीर पर विभिन्न धाराओं में उपेंद्र तिवारी समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल की और कुछ ही दिनों बाद मामला उच्च न्यायालय के आदेश पर एमपी-एमएलए कोर्ट प्रयागराज में चला गया। इसके बाद उपेंद्र तिवारी ने 2018 में मामले में जमानत करा ली। बाद में अदालत के निर्देश के बाद भी उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
इसी क्रम में पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी बृहस्पतिवार को न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम तपस्या त्रिपाठी की न्यायालय में उपस्थित होकर समर्पण किया जिस पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। इसके बाद अदालत ने उनके वारंट निरस्तीकरण के आवेदन पर सुनवाई कर व्यक्तिगत बंधपत्र देने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। इस दौरान लगभग चार घंटे पूर्व मंत्री को न्यायिक अभिरक्षा में गुजारने पड़े।
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गत 29 अप्रैल 2011 को फेफना चौराहे पर जाम लगाने के मामले में एसआई की तहरीर पर विभिन्न धाराओं में उपेंद्र तिवारी समेत कई लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसमें पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल की और कुछ ही दिनों बाद मामला उच्च न्यायालय के आदेश पर एमपी-एमएलए कोर्ट प्रयागराज में चला गया। इसके बाद उपेंद्र तिवारी ने 2018 में मामले में जमानत करा ली। बाद में अदालत के निर्देश के बाद भी उपस्थित नहीं होने पर उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
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इसी क्रम में पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी बृहस्पतिवार को न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम तपस्या त्रिपाठी की न्यायालय में उपस्थित होकर समर्पण किया जिस पर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया। इसके बाद अदालत ने उनके वारंट निरस्तीकरण के आवेदन पर सुनवाई कर व्यक्तिगत बंधपत्र देने के बाद रिहा करने का आदेश दिया। इस दौरान लगभग चार घंटे पूर्व मंत्री को न्यायिक अभिरक्षा में गुजारने पड़े।
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