श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत पं. रामशंकर त्रिपाठी का निधन, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के चार महंत परिवारों में से एक के मुखिया पं. रामशंकर त्रिपाठी (97) का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बृहस्पतिवार को पूर्व महंत पं. रामशंकर त्रिपाठी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें महमूरगंज स्थित निजी चिकित्सालय में ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
मणिकर्णिका घाट पर पं. रामशंकर त्रिपाठी को उनके ज्येष्ठ पुत्र ज्योतिशंकर त्रिपाठी ने मुखाग्नि दी। पं. ज्योतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि शृंगेरीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अभिनव विद्यातीर्थ, द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अभिनव सच्चिदानंद महाराज, कांचीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती जैसी हस्तियां उनसे सनातन संस्कृति के विभिन्न प्रकरणों पर सलाह किया करती थीं।
पं. रामशंकर त्रिपाठी न सिर्फ महामना पं. मदन मोहन मालवीय के कृपापात्र थे अपितु पं. गोपीनाथ कविराज, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, राय आनंदकृष्ण दास, डॉ. वेणीशंकर झा, डॉ. कालूलाल श्रीमाली जैसे विद्वानों के अति प्रिय थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पं. लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, सितारवादक पं. रविशंकर और संगीतकार जार्ज हैरिसर भी उनकी विद्वता के कायल थे। बनारस और काशी विश्वनाथ मंदिर पर कई पुस्तकें लिखने वाले पं. रामशंकर त्रिपाठी नेपाल नरेश वीरेंद्र वीर विक्रम शाहदेव के राज्याभिषेक में काशी के प्रतिनिधि के तौर पर शरीक हुए थे। विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के अध्यक्ष डॉ. कुलपति तिवारी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से हमने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत ही नहीं उर्दू और फारसी साहित्य का महान विद्वान खो दिया है। उनके निधन से विद्वता के एक युग का अवसान हो गया।