फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Former Mahant of Shri Kashi Vishwanath Temple Pandit Ramshankar Tripathi passed away

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत पं. रामशंकर त्रिपाठी का निधन, मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार

Thu, 04 Feb 2021 08:34 PM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Thu, 04 Feb 2021 08:34 PM IST
विज्ञापन
Former Mahant of Shri Kashi Vishwanath Temple Pandit Ramshankar Tripathi passed away
पूर्व महंत पं. रामशंकर त्रिपाठी - फोटो : फाइल

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के चार महंत परिवारों में से एक के मुखिया पं. रामशंकर त्रिपाठी (97) का बृहस्पतिवार को निधन हो गया। मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बृहस्पतिवार को पूर्व महंत पं. रामशंकर त्रिपाठी की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उन्हें महमूरगंज स्थित निजी चिकित्सालय में ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। 

विज्ञापन


मणिकर्णिका घाट पर पं. रामशंकर त्रिपाठी को उनके ज्येष्ठ पुत्र ज्योतिशंकर त्रिपाठी ने मुखाग्नि दी। पं. ज्योतिशंकर त्रिपाठी ने बताया कि शृंगेरीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अभिनव विद्यातीर्थ, द्वारका पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अभिनव सच्चिदानंद महाराज, कांचीपीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती जैसी हस्तियां उनसे सनातन संस्कृति के विभिन्न प्रकरणों पर सलाह किया करती थीं।

विज्ञापन

पं. रामशंकर त्रिपाठी न सिर्फ  महामना पं. मदन मोहन मालवीय के कृपापात्र थे अपितु पं. गोपीनाथ कविराज, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, राय आनंदकृष्ण दास, डॉ. वेणीशंकर झा, डॉ. कालूलाल श्रीमाली जैसे विद्वानों के अति प्रिय थे। डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पं. लाल बहादुर शास्त्री,  इंदिरा गांधी, सितारवादक पं. रविशंकर और संगीतकार जार्ज हैरिसर भी उनकी विद्वता के कायल थे। बनारस और काशी विश्वनाथ मंदिर पर कई पुस्तकें लिखने वाले पं. रामशंकर त्रिपाठी नेपाल नरेश वीरेंद्र वीर विक्रम शाहदेव के राज्याभिषेक में काशी के प्रतिनिधि के तौर पर शरीक हुए थे। विश्वनाथ मंदिर महंत परिवार के अध्यक्ष डॉ. कुलपति तिवारी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से हमने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत ही नहीं उर्दू और फारसी साहित्य का महान विद्वान खो दिया है। उनके निधन से विद्वता के एक युग का अवसान हो गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed