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कबीर की भक्ति में डूबे अनुयायी: भजनों पर झूमे भक्त, गाजेबाजे संग निकली शोभायात्रा; सत्संग से की गुरु बंदगी

Fri, 21 Jun 2024 08:29 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 21 Jun 2024 08:29 PM IST
सार

Varanasi News: भगवान शिव की नगरी काशी शुक्रवार को कबीर की भक्ति में डूबी रही। देशभर से आए कबीरपंथियों ने कबीर प्राकट्य धाम लहरतारा से गाजे-बाजे के शोभायात्रा निकाली। महिलाएं और पुरुष कबीर की वाणी और भजन-कीर्तन करते हुए चल रहे थे। डीजे की धुन पर थिरकते और सतनाम का ध्वज लहराते हुए कबीर की महिमा गा कर रहे थे।

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Followers immersed devotion of Kabir in varanasi Devotees danced Bhajans Worshipped Guru with Satsang
महामहोत्सव की निकल रही शोभायात्रा में डांस करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कबीर साहब के प्राकट्योत्सव पर शुक्रवार को गुरु भक्ति की सागर में हर मन-तन डूबा रहा। लहरतारा स्थित सद्गुरु कबीर प्राकट्यधाम से ठाट-बाट से निकली शोभायात्रा में कबीरवाणी गूंजती रही। मजीरा, ढोल आदि वाद्ययंत्रों पर विभिन्न प्रांतों के अनुयायी अपने अंदाज कीर्तन करते चल रहे थे। डीजे की धुन पर युवा थिरक रहे थे और सतनाम का ध्वज लहरा रहे थे।

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प्राकट्यधाम में आयोजित तीन दिवसीय प्राकट्योत्सव के अंतिम दिन सुबह सतनाम का ध्वज लिए और रथ पर विराजे आचार्य हजूर अर्धनाम साहेब के साथ शोभायात्रा निकाली गई। पांच हजार से अधिक कबीरपंथी गुरु बंदगी करने को उमड़े थे। मार्ग में हजूर अर्धनाम साहेब के दर्शन की होड़ मची थी।
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जगह-जगह नारायण सेवा करते लोग दिखे। पानी, शर्बत, खिचड़ी, घुघूरी, बिस्किट आदि का वितरण कर रहे थे। शोभायात्रा लहरतारा चौराहा, बौलिया, लहरतारा पुल होते हुए पुन: प्राकट्यधाम पहुंची, जहां पर मंदिर में कबीर की आरती उतारने के बाद पूजन हुआ। फिर संतों का प्रवचन हुआ। 

शोभायात्रा में धर्माधिकारी सुधाकर शास्त्री के अलावा बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि प्रांतों के संत और अनुयायी शामिल रहे। 

उधर, कबीरचौरा स्थित मूलगादी में शनिवार से शुरू हो रहे प्राकट्योत्सव में शामिल होने के लिए विभिन्न प्रांतों से पहुंचे अनुयायी भजन कीर्तन कर गुरु बंदगी की। कबीर साहेब के प्राकट्योत्सव पर अनुयायियों ने दिनभर उपवास रखा। रात में प्राकट्यधाम स्थित कबीर मंदिर में चौका आरती व विधिवत पूजा हुई।

कबीर का मार्ग काफी सरल है लेकिन चलना मुश्किल

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महोत्सव के दौरान मंचासीन अतिथिजन। - फोटो : अमर उजाला

सदगुरु कबीर साहब के 626वें प्राकट्य महोत्सव के तीन दिनी कार्यक्रम के दूसरे दिन और योग दिवस के अवसर पर योगासन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। दोपहर एवं शाम को भजन प्रवचन का आयोजन हुआ।

मुख्य अतिथि प्राचीन वाल्मीकि मंदिर (दिल्ली) के स्वामी विवेक नाथ जी महाराज ने कहा कि कबीर साहब का मार्ग काफी सरल है। उनके रास्ते पर चलना बहुत कठिन भी है। कबीर कहते हैं कि कबीरा खड़ा बाजार में लिए लुकाठी हाट। जो घर जारों अपने चले हमारे साथ।

प्राचीन कबीर प्राकट्य स्थल के महंत गोविंद शास्त्री महाराज ने कहा कि कबीर साहब अपनी छोटी-छोटी साखी के माध्यम से जीवन को मुक्ति की बात बताते हैं। कबीर साहब कहते हैं कि
 सांच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप। जाके हृदय सांच है, ताके हृदय आप।

कहा कि यदि हम सत्य के रास्ते पर चलते हैं तो मनुष्य की मुक्ति का रास्ता बन जाता है। इस कार्यक्रम में राजस्थान के रामरसायन महराज, बिहार के ज्ञान स्वरूप तपस्वी महाराज, दिल्ली के डॉक्टर रविंद्र कुमार, दिनेश दास, दयाल दास, प्रह्लाद आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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