लापरवाही की हद: फॉगिंग मशीन का पेट्रोल बाइक में डाला, नगर आयुक्त ने लिया एक्शन; वेतन रोका, एक की सेवा समाप्त
Varanasi News: वाराणसी में फॉगिंग मशीन का पेट्रोल बाइक में डालने पर नगर आयुक्त ने दो का वेतन रोक दिया तो एक की सेवा समाप्त कर दी। साथ ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भी सतर्कता बरतने की हिदायत दी।
विस्तार
वाराणसी नगर निगम की फॉगिंग मशीन का पेट्रोल बाइक में डालने का मामला सामने आया है। जांच में पुष्टि के बाद नगर आयुक्त अक्षत वर्मा ने मुख्य सफाई निरीक्षक ओम नारायण राठौर और सफाईकर्मी चंदन का वेतन रोकते हुए प्रतिकूल प्रविष्टि दी। साथ ही आउटसोर्सिंग कर्मचारी अरुण की सेवा समाप्त कर दी। नगर आयुक्त ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भी हिदायत दी और कहा कि फॉगिंग की निगरानी ठीक से करें।
ये है पूरा मामला
मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया गया। इसमें लिखा गया कि पांडेयपुर सब जोन के सफाईकर्मी चंदन और आउटसोर्सिंग कर्मचारी अरुण मच्छर मारने की हैंड फॉगिंग मशीन से पेट्रोल निकालकर बाइक में डाल रहे हैं। यह भ्रष्टाचार है। इसी वजह से मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। मार्च में भी डेंगू के मरीज मिल रहे हैं। फॉगिंग के बगैर ही मच्छरों को मारने की फर्जी रिपोर्ट लगाई जा रही है।
जांच में सामने आई ये बात
सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया जा रहा। इसका संज्ञान नगर आयुक्त ने लिया और मामले की जांच कराई। इससे पता चला कि फाॅगिंग मशीन से पेट्रोल निकालने और बाइक डालने के खेल में मुख्य सफाई निरीक्षक ओम नारायण राठौर भी शामिल है। सफाईकर्मी और आउटसोर्सिंग कर्मी की मिलीभगत भी सामने आई।
नगर आयुक्त ने कार्रवाई की सूचना निगरानी करने वाले नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुरेंद्र चौधरी को दी। उन्होंने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को हिदायत दी है कि फॉगिंग की निगरानी सही तरीके से करें। इसमें लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। जनता को कोई समस्या न हो।
स्थानीय लोगों ने बनाया वीडियो
पांडेयपुर के पास कुछ स्थानीय लोगों ने वीडियो बनाकर नगर निगम प्रशासन के पास भेजा। साथ ही सोशल मीडिया पर साझा किया, जो अब वायरल हो रहा है।
निगम के पास 8 बड़ी और 108 छोटी मशीनें
नगर निगम के पास 108 छोटी और 8 बड़ी फॉगिंग मशीनें हैं। इसके फॉगिंग का असर दिख नहीं रहा है। निगम हर महीने मच्छर भगाने में लगभग 4 से 5 लाख रुपये खर्च करता है। 100 वार्ड में मच्छर मारने का काम चल रहा है। नगर निगम फॉगिंग करने में जिस केमिकल का प्रयोग करता है, वह बेअसर है। न मच्छर मरता है, न ही भागता है। दवा का मच्छरों पर कोई असर नहीं होता।
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अब फॉगिंग का ट्रायल, धुएं की जगह बनेंगे मिस्ट
बढ़ते मच्छरों के प्रकोप पर ब्रेक लगाने के लिए नगर निगम ने कोल्ड फागिंग का ट्रायल किया गया था। धुआं रहित होने से जहां प्रदूषण नहीं होगा। वहीं फागिंग से मानव स्वास्थ्य पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस तकनीक में मशीन में डीजल की जगह पानी का इस्तेमाल किया जाता है। थर्मल फागिंग में जहां डीजल का प्रयोग कीटनाशक के साथ धुआं बनाने के लिए किया जाता है। वहां कोल्ड फागिंग में कीटनाशक का प्रयोग पानी के साथ किया जाता है। कोल्ड फागिंग में धुएं की जगह मिस्ट बनते हैं।
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