बनारस में बाढ़: दहशत के वो सात दिन...छत पर सत्तू के सहारे कट रही थी जिंदगी, पढ़ें सब्जी विक्रेता का दर्द
गंगा और वरुणा में आई बाढ़ के कारण ढेलवरिया इलाके के श्यामू घर में सात दिनों तक अकेले फंसे रहे। ऐसे में सत्तू और छत पर रखी टंकी में भरे पानी को पीकर जैसे-तैसे भूख मिटाई। सूर्यास्त के बाद जैसे-जैसे रात गहराती जाती, भय बढ़ता जाता।
विस्तार
गंगा और वरुणा में आई बाढ़ का दंश वाराणसी शहर के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों ने किस तरह झेला, वह पानी कम होने के साथ सामने आने लगा है। ढेलवरिया इलाके के श्यामू यादव बताते हैं कि घर में सात दिनों तक अकेले फंसे रहे। बाहर निकलना मुश्किल था। सिर्फ छत की मुंडेर पर बैठकर जलस्तर को बढ़ते और घटते देखना और पड़ोसियों से बात करने में पूरा दिन बीत जाता। बिजली भी नहीं थी। अकेले होने के कारण मकान मानों काटने दौड़ रहा था।
श्यामू कहते हैं कि ठेले पर सब्जी बेचकर बनाया आशियाना चारों ओर बाढ़ की विभीषिका और खाने को कुछ नहीं। ऐसे में सत्तू और छत पर रखी टंकी में भरे पानी को पीकर जैसे-तैसे भूख मिटाई। सूर्यास्त के बाद जैसे-जैसे रात गहराती जाती, भय बढ़ता जाता। जबरन सोने की कोशिश करता पर नींद नहीं आती।
छत और सीढ़ियों को जोड़ने वाला छोटा सा स्थान ही बारिश से बचाता, लेकिन बौछारें यहां भी तंग कर देतीं। हफ्ते भर तक छत पर लगी टंकी में भरे पानी की एक-एक बूंद अमृत की तरह थी। अब पानी तो घटने लगा है लेकिन दुश्वारियां बढ़ गई है। बस राहत इतनी कि अब गंगा मैया वापस जा रही हैं।
जलस्तर में घटाव से राहत, दुश्वारियों से आफत
वाराणसी में गंगा के जलस्तर में लगातार घटाव जारी है। घाटों से गंगा का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा और अपने पीछे दुश्वारियां भी छोड़ता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जलस्तर रात आठ बजे 67.68 मीटर दर्ज किया गया। बाढ़ बुलेटिन के अनुसार गंगा के जलस्तर में छह सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गिरावट हो रही है।
शनिवार को सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 68.23 मीटर दर्ज किया गया। सुबह से ही छह सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से जलस्तर में कमी हो रही थी। गंगा के साथ ही वरुणा का पानी भी तेजी से नीचे उतरने से तटवासियों में राहत है। हालांकि लौटता पानी अपने पीछे गाद व गंदगी की दुश्वारियां छोड़ रहा है। पानी का दायरा कम होने से सड़कों, गलियों और गंगा घाटों पर कीचड़ दिख रहा है। वहीं, रिहाइशी इलाकों में पानी गड्ढों में एकत्र होने से वहां मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। साथ ही दुर्गंध भी बढ़ गई है।