वाराणसी: ईटीए तकनीक से बनेंगी शहर की पांच सड़कें, 10 साल टूटेंगी नहीं, 20 फीसदी कम होगा खर्च
वाराणसी शहर की पांच प्रमुख सड़कें नवंबर 2023 तक चौड़ी की जाएंगी। सड़कों से अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। पेड़ों की कटाई का काम 80 फीसदी पूरा हो गया है। सड़कों के निर्माण में अब तक सड़कों की ऊपरी परत यानी ब्लैक टॉप को उखाड़कर फेंक दिया जाता था।
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टू लेन से फोरलेन बनाई जा रहीं वाराणसी शहर की पांच सड़कें 10 वर्षों तक नहीं टूटेंगी। इन सड़कों को इमल्शन ट्रीटेड एग्रीगेट (ईटीए) तकनीक से बनाया जा रहा है। इससे लागत 20 फीसदी कम आएगी। निर्माण के 48 घंटे के बाद ही सड़क पर फर्राटा भरा जा सकेगा। वाराणसी शहर की पांच प्रमुख सड़कें नवंबर 2023 तक चौड़ी की जाएंगी। सड़कों से अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है। पेड़ों की कटाई का काम 80 फीसदी पूरा हो गया है।
सड़कों के निर्माण में अब तक सड़कों की ऊपरी परत यानी ब्लैक टॉप को उखाड़कर फेंक दिया जाता था। इमलसन ट्रीटेड एग्रीगेट तकनीक का उपयोग जिले में पहली बार किया जाएगा। उखाड़ी गई परत को री-साइकिल के प्लांट में ले जाकर इस पर बिटमिन डामर चढ़ाया जाएगा। इससे फिर उपयोग में आ जाएगी। ऐसे में ब्लैक टॉप फेंकने से होने वाला नुकसान भी नहीं होगा। सड़क मजबूत बनेगी।
ये है इमल्शन ट्रीटेड एग्रीगेट तकनीक
नई तकनीक में 50 फीसदी गिट्टी कम लगती है, लेकिन सड़क की मजबूत बनी रहती है। गिट्टी की मात्रा कम करके इमल्शन बिटमिन का मिश्रण करते हैं, फिर सीमेंट मिलाकर सड़क बनाते हैं। इस तकनीक के इस्तेमाल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक संपदा यानी पहाड़, पत्थर आदि की बचत करना है।
10 अक्तूबर तक दिखने लगेगी एक किलोमीटर सड़क
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक जिन सड़कों का चौड़ीकरण किया ज रहा, उन पर एक किलोमीटर सड़क का निर्माण 10 अक्तूबर तक पूरा होगा। पौधरोपण के साथ ही विक्टोरिया लाइटें लगानी हैं। नाली का निर्माण भी होगा। एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण उदाहरण के तौर पर दिखाने के लिए किया जाएगा। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने कहा कि ईटीए तकनीक से सड़कों का निर्माण जल्दी होगा। सड़क की सिकुड़ती परत नहीं दिखेगी। लागत कम आएगी। गिट्टी की खपत भी कम होगी।
शहर की वो सड़कें, जो चौड़ी होंगी
- लहरतारा-बीएचयू-रवींद्रपुरी - 9.5 किमी
- कचहरी-आशापुर-संदहां - 9.33 किमी
- वाराणसी-भदोही - 8.6 किमी
- लहरतारा-मोहनसराय - 11.18 किमी
- पड़ाव - रामनगर - 6 किमी