देश के पहले राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा ऐसी दुर्दशा, आसपास पड़े गंदे कपड़े और बोरे
देश के प्रथम राष्ट्रपति के प्रतिमा स्थल को कबाड़खाना बना दिया है। यहां काफी दिनों से साफ-सफाई नहीं हुई है। गंदे कपड़े और बोरों में प्रथम राष्ट्रपति की प्रतिमा स्थली छिप गई है।
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देश के पहले राष्ट्रपति और भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐसी दुर्दशा किसी ने सोची भी नहीं थी। स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर को संवारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक धरोहरों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के रखरखाव पर स्थानीय प्रशासन का नक्कारापन सामने आ रहा है।
काशी के प्रमुख घाटों में शुमार राजेंद्र प्रसाद घाट के क रीब प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू की प्रतिमा सालों पहले लगाई गई थी। अब यह पूरी तरह से उपेक्षा की शिकार हो गई है। रंग-रोगन साफ-सफाई को कौन कहे, प्रतिमा स्थल को गंदे कपड़ों और बोरे से ढक दिया गया। यह हाल देश के प्रथम राष्ट्रपति का है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन महापुरुषों की प्रतिमाओं और धरोहरों के प्रति कितना संवेदनशील होगा।
गंगा के तट पर राजेंद्र प्रसाद घाट को हर कोई जानता है, लेकिन कम ही लोगों को पता होगा कि यहां पर देश के प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा भी लगी है। काफी मशक्कत के बाद जब प्रतिमा स्थल पर पहुंचेंगे तो देखकर आश्चर्य में पड़ जाएंगे कि यह भारत रत्न की प्रतिमा स्थली है या कोई कबाड़खाना। लेकिन राजेंद्र प्रसाद घाट पर कुछ ऐसा ही नजारा है।
घाट पर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने प्रथम राष्ट्रपति की प्रतिमा का अनावरण नौ जुलाई 1988 को किया था। वर्तमान हालत यह है कि प्रतिमा स्थल पर आसपास सब्जी मंडी लगाने वाले और रहने वालों ने कब्जा जमा लिया है। कोई वहां पर कपड़े सुखाता है तो किसी ने सब्जियों की पेटी रखी है। किसी ने साइकिल भी खड़ी कर रखी है।