{"_id":"5aed9efe4f1c1b350a8b83d8","slug":"first-kabir-academy-will-open-in-sarnath","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सारनाथ में खुलेगा देश का पहला कबीर विद्यापीठ, सहेजी जाएंगी संतों की स्मृतियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सारनाथ में खुलेगा देश का पहला कबीर विद्यापीठ, सहेजी जाएंगी संतों की स्मृतियां
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 05 May 2018 05:57 PM IST
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तथागत की उपदेश स्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ की स्थापना के लिए एक कदम और बढ़ गया है। विद्यापीठ में कबीरपंथी संतों के जीवन-दर्शन पर अध्ययन-अध्यापन, शोध एवं विविध आयोजन किए जाएंगे।
लगभग सोलह करोड़ की लागत से बनने वाले विद्यापीठ के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। कबीर मूलगादी के पीठाधीश्वर संत विवेक दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ खुलेगी।
शिक्षा और शोध के साथ ही यहां संत कबीरदास के अलावा उनके समकालीन तथा उसके बाद के 150 संतों की स्मृतियों को भी यहीं सहेजा जाएगा। संत रैदास, सेन भगत, संत दादू, संत पीपा महाराज, संत हरिव्यास, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत सुंदर दास, शंकर देव और वामदेव इनमें प्रमुख हैं।
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वर्तमान पीढ़ी को मध्यकालीन संतों और तत्कालीन सामाजिक स्थिति संग साहित्य से परिचित कराया जाएगा। संत कबीर से जुड़े साहित्य का प्रकाशन यहीं से होगा। कबीर पार्क, आर्ट गैलरी, सेमिनार हॉल तथा दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों के रहने के लिए साधक निवास का निर्माण भी कराया जाएगा।
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लगभग सोलह करोड़ की लागत से बनने वाले विद्यापीठ के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी मंजूरी दे दी है। कबीर मूलगादी के पीठाधीश्वर संत विवेक दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से भगवान बुद्ध की उपदेशस्थली सारनाथ में कबीर विद्यापीठ खुलेगी।
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शिक्षा और शोध के साथ ही यहां संत कबीरदास के अलावा उनके समकालीन तथा उसके बाद के 150 संतों की स्मृतियों को भी यहीं सहेजा जाएगा। संत रैदास, सेन भगत, संत दादू, संत पीपा महाराज, संत हरिव्यास, संत नामदेव, संत एकनाथ, संत सुंदर दास, शंकर देव और वामदेव इनमें प्रमुख हैं।
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वर्तमान पीढ़ी को मध्यकालीन संतों और तत्कालीन सामाजिक स्थिति संग साहित्य से परिचित कराया जाएगा। संत कबीर से जुड़े साहित्य का प्रकाशन यहीं से होगा। कबीर पार्क, आर्ट गैलरी, सेमिनार हॉल तथा दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों के रहने के लिए साधक निवास का निर्माण भी कराया जाएगा।
संग्रहालय में संरक्षित की जाएंगी धरोहरें
कबीर की धरोहरों को नए कलेवर में यहीं बनने वाले संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा। संग्रहालय में नीरू और नीमा के विग्रह भी होंगे। संत कबीर के मूलगादी कबीरचौरा मठ के नीरू टीला को केंद्र में रखकर संग्रहालय का प्रारूप बनाया गया है।
इसी स्थान पर कबीर का लालन-पालन करने वाले नीरू और नीमा की मजार भी है। वह कुआं भी यहीं है, जिसका पानी संत कबीर इस्तेमाल करते थे। संग्रहालय पर तकरीबन 11 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
संग्रहालय में कबीर की खड़ाऊं, कपड़ा बुनने वाला चरखा तथा अन्य सारी चीजें यहां रखी जाएंगी। यही नहीं, कबीर की जन्मस्थली लहरतारा में भी लगभग सत्रह करोड़ रुपये से मनुष्य जीवन के दैहिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर आधारित दुनिया का पहला स्मारक बनाया जाएगा। शिवपुर में 500 बेड के मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने के लिए भूमिपूजन हो चुका है।
इसी स्थान पर कबीर का लालन-पालन करने वाले नीरू और नीमा की मजार भी है। वह कुआं भी यहीं है, जिसका पानी संत कबीर इस्तेमाल करते थे। संग्रहालय पर तकरीबन 11 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
संग्रहालय में कबीर की खड़ाऊं, कपड़ा बुनने वाला चरखा तथा अन्य सारी चीजें यहां रखी जाएंगी। यही नहीं, कबीर की जन्मस्थली लहरतारा में भी लगभग सत्रह करोड़ रुपये से मनुष्य जीवन के दैहिक एवं आध्यात्मिक पक्षों पर आधारित दुनिया का पहला स्मारक बनाया जाएगा। शिवपुर में 500 बेड के मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने के लिए भूमिपूजन हो चुका है।