UP: पहली बार पूर्वांचल के कुलदेवताओं पर यूपी कॉलेज में रिसर्च, बनेगा डॉक्यूमेंट; जानें क्या होगा खास
Varanasi News: वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज को पूर्वांचल के कुल देवता और कुल देवियों पर शोध के लिए आईसीएसएसआर से 12 लाख रुपये का फंड मिला है। दो वर्षों तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट में गांवों के डीह बाबा, बरम बाबा समेत लोक देवताओं, उनसे जुड़ी परंपराओं, लोकगीतों और सामाजिक मान्यताओं का दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
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Varanasi News: निमिया के डार मईया झूलेली झूलनवा... जैसे ही हजारों गीतों से गांवों को बचाने की कला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। बिना कुल देवता की अनुमति के न तो बरात उठते हैं और न ही मुंडन या जनेऊ संस्कार संभव है। इस आदिम मान्यता और भरोसे के पीछे की असली वजह क्या है और उससे दूरियां क्यों बन रही है, इससे पर्दा हटेगा।
पहली बार उदय प्रताप कॉलेज पूर्वांचल के गांवों के डीह बाबा, बरम बाबा, सिद्धेश्वरी, मुंडेश्वरी, मां प्रभावती, चंडिका, त्रिपुदा, मनिया देवी, अगियाबीर जैसे हजारों कुल देवता और कुल देवियों पर एक विधिवत रिपोर्ट बनाएगा। इनसे जुड़े घरेलू रस्मों, जुड़ी किवदंतियों और कहानियों के साथ गांव वालों के भावों और संबंधों को डॉक्यूमेंट में उतारा जाएगा।
गांवों की चीजों को बचाना है तो देवताओं से जोड़ दिया
इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च ने इसके लिए यूपी कॉलेज को 12 लाख रुपये का फंड दिया है। इसके प्रोजेक्ट डायरेक्टर ग्रामीण समाजशास्त्री डॉ. सुधीर कुमार राय ने बताया कि गांवों में पीपल, नीम, कटहल, जानवर, पक्षी, फसल जैसी चीजों को बचाना है तो उसे लोगों ने देवताओं से जोड़ दिया गया है। जैसे निमिया के डार मईया झूलेली झूलनवा... गीत बने। ऐसे ही कहार गीत, धोबी गीत, कजरी, लोकगीतों में कुल देवताओं का अध्ययन किया जाएगा।
12 लाख का फंड मिला, दो साल में पूरा होगा रिसर्च
प्रो. राय ने बताया कि 15 जनवरी से रिसर्च का काम शुरू हो गया है जो कि दो साल में पूरा होगा। बनारस के अलावा, गोरखपुर, गाजीपुर, मऊ, जौनपुर, आजमगढ़, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, देवरिया आदि जिलों के कुल देवताओं को सहेजा जाएगा। इस प्रोजेक्ट में प्राचार्य प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह्र प्रो. एस के द्विवेदी और प्रो. गोरखनाथ भी शामिल हैं।
यूपी कॉलेज के प्रस्ताव को आईसीएसएसआर ने स्वीकारा है। अब पूर्वांचल के सुदूर गांवों में जाकर अगले दो साल तक कुल देवताओं का सर्वे कराया जाएगा। हर गांव में एक या दो देवता भी हो सकते हैं जिन पर रिसर्च किया जाएगा। मुंडन, जनेऊ संस्कार, शादी विवाद सहित कई मौकों पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी क्या प्रासंगिकता है इसे भी तलाशा जाएगा। आखिरकार क्यों कई हजार साल से इनकी पूजा होती चली आ रही है। -प्रो. धर्मेंद्र कुमार सिंह, को-डायरेक्टर और प्राचार्य, यूपी कॉलेज