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UP: काशी में फिल्म निर्देशक सुधीर व अनुभव, कहा- बॉक्स ऑफिस की अपेक्षाओं में मूल कहानी की आत्मा ही खो जाती है

Sun, 19 Jul 2026 03:16 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 19 Jul 2026 03:16 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी की नागरी प्रचारिणी सभा में आयोजित कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्र और अनुभव सिन्हा ने कहा कि बॉक्स ऑफिस की अपेक्षाओं के दबाव में कई बार मूल कहानी की आत्मा खो जाती है। उन्होंने साहित्य, सिनेमा और समाज के संबंधों पर भी विचार साझा किए तथा सशक्त कहानी को फिल्मों की सबसे बड़ी ताकत बताया।

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Film directors Sudhir and Anubhav in Kashi soul of original story gets lost amidst box office expectations
फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्र और अनुभव सिन्हा से सौरभ चक्रवर्ती ने बातचीत की। - फोटो : संवाद

विस्तार

Nagri Pracharini Sabha Varanasi: नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस समारोह के तीसरे और अंतिम दिन ‘युवता और सिनेमा’ विषय पर आयोजित संवाद में फिल्म निर्देशक सुधीर मिश्र और अनुभव सिन्हा से सौरभ चक्रवर्ती ने बातचीत की। दोनों निर्देशकों ने बदलते दौर में शब्दों और दृश्यों के बदलते रिश्तों पर अपने विचार साझा किए। 

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उन्होंने कहा कि आज के व्यावसायिक दौर में बॉक्स ऑफिस की अपेक्षाओं और समय की सीमाओं के कारण कई बार फिल्मों की मूल कहानी की आत्मा कहीं न कहीं खो जाती है। संवाद के बाद संगीत से जुड़ी तीन प्रस्तुतियां भी हुईं।
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दोनों निर्देशकों ने कहा कि एक फिल्मकार को अपनी मनचाही फिल्म बनाने के लिए कई बार ऐसी फिल्में भी बनानी पड़ती हैं, जो उसकी व्यक्तिगत रचनात्मक इच्छा के अनुरूप नहीं होतीं। प्रश्नोत्तर सत्र में भोजपुरी सिनेमा के वर्तमान स्वरूप और उसके भविष्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। 

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Film directors Sudhir and Anubhav in Kashi soul of original story gets lost amidst box office expectations
स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते कलाकार। - फोटो : संवाद

वक्ताओं ने अपने फिल्मी सफर के अनुभव साझा करते हुए बताया कि फिल्म जगत से उनका जुड़ाव कैसे हुआ और इस क्षेत्र में औपचारिक शिक्षा तथा निरंतर अध्ययन का कितना महत्व है। चर्चा के दौरान भारत में विज्ञान-कल्पना (साइंस फिक्शन) फिल्मों के अपेक्षित सफलता न मिलने के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया।

पूरी बातचीत का समापन इस विचार के साथ हुआ कि साहित्य और सिनेमा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक माध्यम हैं, जो मिलकर समाज और मानवीय संवेदनाओं को अधिक प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। कार्यक्रम में सभा के प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल भी उपस्थित रहे।

पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया के सुरों में घुली मिठास
नागरी प्रचारिणी सभा के स्थापना दिवस समारोह के अंतिम दिन सुर, लय और ताल से सजी संगीतमय प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात कबीर भजन गायक पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया ने कबीर के पदों के माध्यम से जीवन के मूल तत्वों का बोध कराया, जबकि कश्यप बंधुओं ने अपनी सुरमयी प्रस्तुति से बनारस घराने की गायकी की मिठास का एहसास कराया।

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