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तालकीर्तन में कैजोल और मुरचंग की संगत रही बेजोड़, झूमे श्रोता और दर्शक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 09 Apr 2018 10:28 PM IST
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तबला वादक पंडित सुरेश तलवरकर के साथ उनकी बेटी सावनी तलवलकर
- फोटो : अमर उजाला
संकट मोचन संगीत समारोह की पांचवीं निशा कैजोल के सम्मोहन में बंधी रही। संगीत के महाकुंभ में कैजोल को ताल कीर्तन के संयोजन में पेश किया गया। पांचवीं निशा के दूसरे चरण में ताल कीर्तन पर श्रोता और दर्शक झूम उठे। पाश्चात्य वाद्य यंत्र कैजोल और ड्रम इन दोनों पर ही तबले की बेजोड़ संगत ने सुधि दर्शकों के संगीत की पिपासा को शांत किया।
पांचवीं निशा के दूसरे चरण में तबला वादक पंडित सुरेश तलवरकर के साथ उनकी बेटी सावनी तलवलकर, पखावज पर ओंकार दर्वी, कैजोल पर उमेश वारभुवन और वेस्टर्न ड्रम पर अभिषेक गुरुक ने झपताल की बंदिशों, टुकड़ों तिहाइयों और रेलों को संगीत के सुरों में पिरोया।
गायन विनय रामदास और हारमोनियम पर संगत मिलिंद कुलकर्णी ने की। इससे पूर्व पंडित कादरी गोपाल ने सेक्सोफोन पर उपशास्त्रीय धुनों की बहार छेड़ी। उन्होंने अपने गायन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास जी और संत तुकाराम के भजनों के अलावा बापू के प्रिय भजन की धुन भी बजाई।
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तालवाद्य कचहरी के रूप में मंचासीन उनकी शिष्य मंडली ने वायलिन, पखावज और तबला की संगत से माहौल को एक अलग ही रंग में रंग दिया। वायलिन पर कन्याकुमारी का वादन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा।
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पांचवीं निशा के दूसरे चरण में तबला वादक पंडित सुरेश तलवरकर के साथ उनकी बेटी सावनी तलवलकर, पखावज पर ओंकार दर्वी, कैजोल पर उमेश वारभुवन और वेस्टर्न ड्रम पर अभिषेक गुरुक ने झपताल की बंदिशों, टुकड़ों तिहाइयों और रेलों को संगीत के सुरों में पिरोया।
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गायन विनय रामदास और हारमोनियम पर संगत मिलिंद कुलकर्णी ने की। इससे पूर्व पंडित कादरी गोपाल ने सेक्सोफोन पर उपशास्त्रीय धुनों की बहार छेड़ी। उन्होंने अपने गायन के दौरान गोस्वामी तुलसीदास जी और संत तुकाराम के भजनों के अलावा बापू के प्रिय भजन की धुन भी बजाई।
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तालवाद्य कचहरी के रूप में मंचासीन उनकी शिष्य मंडली ने वायलिन, पखावज और तबला की संगत से माहौल को एक अलग ही रंग में रंग दिया। वायलिन पर कन्याकुमारी का वादन विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहा।
राजन साजन के पुत्रों ने किया उनका प्रतिनिधित्व
रितेश मिश्र और रजनीश मिश्र ने दी प्रस्तुति
- फोटो : अमर उजाला
वाद्ययंत्र मुरचंग की ध्वनि भी अरसे बाद संकटमोचन के दरबार में गूंजी। तबले पर पंडित तन्मय घोष ने संगत की। विख्यात गायक पंडित विश्वनाथ ने ख्याल गायकी में राग जोग की अवतारणा की।
अलापचारी का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने कुछ पारंपरिक रचनाओं को प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर पंडित समर साहा और हरमोनियम पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत की।
पांचवीं निशा के समापन और सातवें प्रस्तुति लेकर पंडित राजन साजन मिश्र के पुत्र रितेश मिश्र और रजनीश मिश्र मंचासीन हुए। उन्होंने पांचवीं निशा को विराम देते हुए नई सुबह का स्वागत राग रामकली से किया। उनके साथ तबले पर संगत संजू सहाय ने की।
अलापचारी का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करने के बाद उन्होंने कुछ पारंपरिक रचनाओं को प्रस्तुत किया। उनके साथ तबले पर पंडित समर साहा और हरमोनियम पंडित धर्मनाथ मिश्र ने संगत की।
पांचवीं निशा के समापन और सातवें प्रस्तुति लेकर पंडित राजन साजन मिश्र के पुत्र रितेश मिश्र और रजनीश मिश्र मंचासीन हुए। उन्होंने पांचवीं निशा को विराम देते हुए नई सुबह का स्वागत राग रामकली से किया। उनके साथ तबले पर संगत संजू सहाय ने की।