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रतजगा: कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया, बदरिया घेरी आइल ननदी... शहर से गांव तक सजीं जलेबा की दुकानें
Mon, 31 Aug 2026 05:43 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Mon, 31 Aug 2026 05:43 PM IST
सार
पर्व के विशेष व्यंजन जलेबा का भी जमकर लुत्फ उठाया गया। मोहल्लों और चौराहों पर सजीं जलेबा की दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी। लोगों ने जलेबा खरीदा और अपनों के बीच बांटकर पर्व की खुशियां साझा कीं।
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शहर से गांव तक सजीं जलेबा की दुकानें
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भादो मास के त्योहारों का आगाज रविवार को कजरी की पूर्व संध्या पर हुए रतजगा उत्सव से हुआ। शहर से लेकर गांव तक महिलाओं ने कजरी गीतों के जरिये रिश्तों में मिठास घोली। कइसे खेले जइबू सावन में कजरिया बदरिया घेरी आइल ननदी... जैसी पारंपरिक कजरी भी खूब गूंजी।
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पर्व के विशेष व्यंजन जलेबा का भी जमकर लुत्फ उठाया गया। मोहल्लों और चौराहों पर सजीं जलेबा की दुकानों पर खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी। लोगों ने जलेबा खरीदा और अपनों के बीच बांटकर पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान दो से चार किलो तक के जलेबा तैयार किए गए। बाजार में जलेबा 150 से 200 रुपये किलो तक बिका।
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कजरी से एक दिन पहले होने वाले रतजगा की परंपरा शहर से लेकर गांव तक निभाई गई। महिलाओं ने समूह बनाकर देवी वंदना के साथ कजरी गायन की शुरुआत की। इसके बाद देर रात तक कजरी गीत गाने और थिरकने के साथ जलेबा का आनंद लिया। रातभर जलेबा की मिठास घुलती रही और महिलाओं की टोलियां भादो की फुहार के बीच कजरी की तान छेड़ती रहीं।
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लहुराबीर, चेतगंज, सिगरा, महमूरगंज, पांडेयपुर, दशाश्वमेध घाट, चौक, मैदागिन, विशेश्वरगंज, भोजूबीर, अर्दली बाजार, लहरतारा, बौलिया, चांदपुर और सारनाथ समेत कई इलाकों में जलेबा की दुकानें सजीं। देर रात तक जलेबा की बिक्री होती रही। साहित्यकार हीरालाल मिश्र ने बताया कि कजरी के उल्लास की शुरुआत रतजगा से ही होती है।
पेड़ों पर डाले झूले, उठाया आनंद
ग्रामीण इलाकों में भी रतजगा का उल्लास देखने को मिला। विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ों पर झूले डाले गए और महिलाओं ने झूला झूलने के साथ जलेबा का आनंद लिया। नागेपुर में महिलाओं ने पेड़ों पर झूले डालकर रतजगा मनाया। सिंधौरा क्षेत्र में महिलाओं ने पारंपरिक कजरी गाई और जलेबा का स्वाद लिया। कारोबारी विकास ने बताया कि जलेबी तो सालभर मिलती है, लेकिन जलेबा रतजगा के दिन ही काशी में विशेष रूप से मिलता है। चिरईगांव, चोलापुर, आराजीलाइन, सेवापुरी और बड़ागांव ब्लॉक के बाजारों में भी जलेबा की दुकानें सजीं और खरीदारों की भीड़ रही।
कजरी गीतों और नृत्य से सजाई लोक संस्कृति की आभा
सर्व ब्राह्मण महासभा महिला मंच की ओर से रविवार को रवींद्रपुरी स्थित श्रीनाथ सत्संग भवन में तीज मिलन समारोह में महिलाओं ने कजरी गायन, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया। मुख्य अतिथि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर की पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. उमा त्रिपाठी ने कहा कि लोक संगीत और लोक परंपराओं को विलुप्त होने से बचाने की जरूरत है। उन्होंने कजरी गीतों के अधिक से अधिक प्रसार पर जोर दिया। सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. कमलाकांत उपाध्याय ने कजरी के इतिहास और लोक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। सुमन अग्निहोत्री ने कजरी गीत और नृत्य प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस मौके पर मनु लता शर्मा, डॉ. मंजू लता त्रिपाठी, डॉ. ममता तिवारी, प्रो. लता दुबे, सुमन द्विवेदी, सुषमा शुक्ला आदि मौजूद रहीं।
ग्रामीण इलाकों में भी रतजगा का उल्लास देखने को मिला। विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ों पर झूले डाले गए और महिलाओं ने झूला झूलने के साथ जलेबा का आनंद लिया। नागेपुर में महिलाओं ने पेड़ों पर झूले डालकर रतजगा मनाया। सिंधौरा क्षेत्र में महिलाओं ने पारंपरिक कजरी गाई और जलेबा का स्वाद लिया। कारोबारी विकास ने बताया कि जलेबी तो सालभर मिलती है, लेकिन जलेबा रतजगा के दिन ही काशी में विशेष रूप से मिलता है। चिरईगांव, चोलापुर, आराजीलाइन, सेवापुरी और बड़ागांव ब्लॉक के बाजारों में भी जलेबा की दुकानें सजीं और खरीदारों की भीड़ रही।
कजरी गीतों और नृत्य से सजाई लोक संस्कृति की आभा
सर्व ब्राह्मण महासभा महिला मंच की ओर से रविवार को रवींद्रपुरी स्थित श्रीनाथ सत्संग भवन में तीज मिलन समारोह में महिलाओं ने कजरी गायन, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिये लोक संस्कृति और परंपराओं को जीवंत किया। मुख्य अतिथि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर की पूर्व संकाय अध्यक्ष प्रो. उमा त्रिपाठी ने कहा कि लोक संगीत और लोक परंपराओं को विलुप्त होने से बचाने की जरूरत है। उन्होंने कजरी गीतों के अधिक से अधिक प्रसार पर जोर दिया। सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. कमलाकांत उपाध्याय ने कजरी के इतिहास और लोक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला। सुमन अग्निहोत्री ने कजरी गीत और नृत्य प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया। इस मौके पर मनु लता शर्मा, डॉ. मंजू लता त्रिपाठी, डॉ. ममता तिवारी, प्रो. लता दुबे, सुमन द्विवेदी, सुषमा शुक्ला आदि मौजूद रहीं।