{"_id":"58262f284f1c1b342fb3ae3f","slug":"festival-of-ganga-begins-in-varanasi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरसरि के तट पर सजे सुर-ताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरसरि के तट पर सजे सुर-ताल
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Sat, 12 Nov 2016 02:20 AM IST
विज्ञापन
तीन दिवसीय गंगा महोत्सव शुरू
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा के सुरम्य तट पर शुक्रवार की रात सुर, लय, ताल का अनूठा संगम हुआ। बाबा विश्वनाथ की नगरी में डमरू-शंखनाद की मोहक जुगलबंदी के साथ तीन दिवसीय गंगा महोत्सव का आगाज हुआ। ख्यात गायक हरिहरन ने गीतों, भजनों से लोगों को मुग्ध किया तो सुरबहार और रुद्रवीणा की युगलबंदी पर हर किसी के तन-मन झंकृत हुए।
रात करीब 7:30 बजे गंगा तट पर बने मुक्ताकाशीय मंच पर रतिशंकर एवं समूह के डमरू-शंखनाद से गंगा महोत्सव का श्रीगणेश हुआ। इनके बाद रमा वैद्यनाथन ने भरतनाट्यम से आगाज किया। भावों-इशारों के जरिए उन्होंने स्तुति और मनुहार दोनों को नृत्य में पिरोया। बांसुरी पर रजत प्रसन्ना, मृदंगम पर मुभोध श्रीधरन, गायन के वेंकटेश्वर, नाट्य वगम पर डॉ. एस वासुदेवन ने संगत की। नृत्य में साथ दिया शुभामणि चंद्रशेखर, अरुण मथाई ने। इनके बाद सुरबहार पर पुष्पराज कोष्ठी और रुद्रवीणा पर बहाउद्दीन डागर की युगलबंदी यादगार बनी। पखावज पर पं. दालचंद ने संगत की।
इनके बाद हरिहरन ने मंच संभाला। भजन- ‘मैं तो कब से हूं तेरी शरण में...’ से शुरुआत की। इसके बाद ‘रूठ गए मोरे बांके संवरिया/कैसे बिताऊं मैं बाली उमरिया...’ जैसे गीतों से उन्होंने खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर मुख्य सचिव राहुल भटनागर, पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र आदि
विज्ञापन
उपस्थित थे।
विज्ञापन
रात करीब 7:30 बजे गंगा तट पर बने मुक्ताकाशीय मंच पर रतिशंकर एवं समूह के डमरू-शंखनाद से गंगा महोत्सव का श्रीगणेश हुआ। इनके बाद रमा वैद्यनाथन ने भरतनाट्यम से आगाज किया। भावों-इशारों के जरिए उन्होंने स्तुति और मनुहार दोनों को नृत्य में पिरोया। बांसुरी पर रजत प्रसन्ना, मृदंगम पर मुभोध श्रीधरन, गायन के वेंकटेश्वर, नाट्य वगम पर डॉ. एस वासुदेवन ने संगत की। नृत्य में साथ दिया शुभामणि चंद्रशेखर, अरुण मथाई ने। इनके बाद सुरबहार पर पुष्पराज कोष्ठी और रुद्रवीणा पर बहाउद्दीन डागर की युगलबंदी यादगार बनी। पखावज पर पं. दालचंद ने संगत की।
विज्ञापन
इनके बाद हरिहरन ने मंच संभाला। भजन- ‘मैं तो कब से हूं तेरी शरण में...’ से शुरुआत की। इसके बाद ‘रूठ गए मोरे बांके संवरिया/कैसे बिताऊं मैं बाली उमरिया...’ जैसे गीतों से उन्होंने खूब तालियां बटोरीं। इस मौके पर मुख्य सचिव राहुल भटनागर, पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र, संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र, मंडलायुक्त नितिन रमेश गोकर्ण, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र आदि
विज्ञापन
उपस्थित थे।