फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   festival

धनतेरस से आरंभ होगा दीपोत्सव, घर-घर पूजीं जाएंगी महालक्ष्मी

Wed, 11 Nov 2020 01:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 01:32 AM IST
विज्ञापन
festival
वाराणसी। दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी और गणेश के स्वागत की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। धनतेरस के साथ ही दीपों के महापर्व की शुरुआत हो जाएगी। घर-घर महालक्ष्मी के स्वागत की तैयारियां चल रही हैं। शुभ मुहूर्त में महालक्ष्मी का आह्वान करके घरों की चौखट से गंगा घाट तक दीप रोशन होंगे।
विज्ञापन

काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि 14 नवंबर को दिन में 9 बजकर 49 मिनट से अमावस्या लग रही है जो प्रदोष काल में मिल रही है। दूसरे दिन 15 नवंबर को अमावस्या दिन में 11 बजकर 27 मिनट तक है, लेकिन प्रदोष काल में नहीं मिल रही है। निर्णय सिंधु के अनुसार दीपावली 14 नवंबर को ही मनाई जाएगी।
विज्ञापन

गजाभिषिक्त लक्ष्मी की आराधना से मिलती है ईष्ट सिद्धि
डॉ. द्विवेदी ने बताया कि दीपावली में गजाभिषिक्त लक्ष्मी की आराधना से इष्ट सिद्धि होती है। वास्तुशास्त्र के ग्रंथों में पूजा के लिए गजाभिषिक्त लक्ष्मी की प्रतिमा बनवाकर घर या देवालय में पूजन करने का विधान किया गया है। यह प्रतिमा 11 अंगुल से कम होनी चाहिये। कमल के आसन पर विराजित और दोनों ही ओर हाथियों द्वारा जलाभिषेक वाली निश्चला लक्ष्मी की पूजा करने से घर में स्थायी वैभव की प्रतिष्ठा होती है। इसके लिए आगमोक्त विधान को स्वीकार किया जाना चाहिए। लक्ष्मी गायत्री मंत्र का निरंतर जाप भी ईष्टप्रद है। देवी भागवत में कहा गया है कि कमलासन पर विराजित लक्ष्मी की पूजा से इंद्र ने देवाधिराज होने का गौरव प्राप्त किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

मिल रहा है अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल
ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र ने बताया कि शास्त्रों में दीपावली के पूजन में प्रदोष काल अति महत्वपूर्ण होता है। धर्मशास्त्रोक्त दीपावली प्रदोष काल एवं महानिशीथ काल व्यापिनी अमावस्या में है। प्रदोष काल का महत्व गृहस्थों एवं व्यापारियों के लिए और महानिशीथ काल का तांत्रिकों के लिए होता है। इस साल अमावस्या व्यापिनी महानिशीथ काल प्राप्त हो रहा है। महानिशीथ काल की पूजा मध्यरात्रि 12:40 से 2 बजे के मध्य की जा सकती है।

प्रदोष काल शाम 05:19 से 07: 53 बजे तक रहेगा।
पूजन एवं खाता पूजन हेतु शुभ मुहूर्त स्थिर लग्न वृश्चिक दिन में 06: 47 बजे से लेकर 09: 04 तक
कुंभ स्थिर लग्न दिन में 12:57 से 2: 28 तक
वृष स्थिर लग्न सायं 5:33 से 7:29 तक विद्यमान रहेगा। स्थिर लग्न में पूजा करना लाभप्रद होता है।
12 नवंबर को ही मनाई जाएगी धनतेरस
पं. गणेश मिश्र का कहना है कि दीपावली के दो दिन पूर्व त्रयोदशी को भगवान धनवन्तरि के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष त्रयोदशी 12 नवंबर को सायं में 6:31 मिनट से लग रही है जो शुक्रवार 13 नवंबर को दिन में 4: 11 मिनट तक रहेगी। भविष्योतर पुराण के अनुसार यमराज को दीपदान के लिए सायंकाल व्याप्त त्रयोदशी की प्रधानता है। अत: बृहस्पतिवार को सायंकाल त्रयोदशी प्राप्त होने से 12 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed