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सावन की मस्ती और उमंग, कोरोना ने कर दी भंग
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वाराणसी। सावन की हरियाली है, उसे मनाने का उत्साह भी है। लेकिन इन सब पर कोरोना ने पानी फेर दिया है। नहीं तो पिछले साल तक सभी महिलाएं इसका बेसब्री से इंतजार करती थीं। लेडीज क्लबों में सावन का उल्लास, उत्साह और मस्ती को सेलिब्रेट करने के लिए अलग अलग थीम पर कार्यक्रम आयोजित होते थे। सखियां एक साथ रंग-बिरंगे परिधानों में सजधज कर हाथों में मेहंदी और बालों में गजरा लगाए झूले का आनंद लेती थी। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ कजरी गाती थीं। सावन पर आधारित विभिन्न खेलों और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर इस त्यौहार को मनाती थी। लेकिन कोरोना ने इस मस्ती को किरकिरा कर दिया है।
महिलाओं का कहना है कि सावन तो शुरू हो गया है लेकिन इसका एहसास ही नहीं हो रहा है। उमंग और खुमारी का संगम हरियाली तीज तक ऐसे ही बना रहता था। लेकिन कोरोना काल मे सखियों की मस्ती, एक साथ बैठकर मेहंदी लगाने की परंपरा, गीत- मल्हार अब सिर्फ वर्चुअल दुनिया तक में गुम हो चुका है।
सखियों संग सावन का असली आनंद
सावन का असली आनंद सखियों संग हंसी ठिठोली में ही है। इस साल वो उत्साह और उमंग कम हुआ है। हर साल मारवाड़ी समाज का तीज व सावन मेला लगता था जिसमें खूब मस्ती होती थी। दोस्तों के साथ मेहंदी लगवाना, सेल्फी लेना, पर इस बार सावन फीका सा लग रहा। - आयुषी जिंदल, अस्सी
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कजरी की मल्हार बिन सुना लग रहा सावन
सावन पर कई सालों से हम लोग वृहद आयोजन करते थे। जिसमें सखियां कजरी गाती थीं। ढोलक और मंजीरे की तान पर हम सब मित्र करते थे इस बार न कजरी है और न समूह में सहेलियों संग बैठकर मेहंदी लगाने की खुशियां। इसलिए सावन सूना सा लग रहा है।- रश्मि अग्रवाल, मलदहिया
वर्चुअल सावन उत्सव में वह आनंद नहीं
बाग-बगीचे में घूमते सावन गीत व उस पर थिरकती सखियां। मगर इस साल यह उत्साह और उमंग वर्चुअल सावन महोत्सव में नहीं देखने को मिल रहा। संक्रमण के बढ़ते दायरे की वजह से सभी के मन में तनाव बढ़ रहा है। इस साल सावन बस औपचारिकता ही लग रही है।- श्रद्धा अग्रवाल, सुंदरपुर
याद आ रहा सखियों संग झूला झूलना
क्लब की ओर से भी कई तरह के कार्यक्रम में हम लोग सावन का खूब आनंद उठाते थे। रंग-बिरंगे परिधानों में सजधज कर हाथों में मेहंदी रचाना। नृत्य- संगीत के कार्यक्रमों की ढेर सारी मस्ती का वह रंग इस साल फीका सा लग रहा है।- रीता जायसवाल, पहड़िया
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महिलाओं का कहना है कि सावन तो शुरू हो गया है लेकिन इसका एहसास ही नहीं हो रहा है। उमंग और खुमारी का संगम हरियाली तीज तक ऐसे ही बना रहता था। लेकिन कोरोना काल मे सखियों की मस्ती, एक साथ बैठकर मेहंदी लगाने की परंपरा, गीत- मल्हार अब सिर्फ वर्चुअल दुनिया तक में गुम हो चुका है।
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सखियों संग सावन का असली आनंद
सावन का असली आनंद सखियों संग हंसी ठिठोली में ही है। इस साल वो उत्साह और उमंग कम हुआ है। हर साल मारवाड़ी समाज का तीज व सावन मेला लगता था जिसमें खूब मस्ती होती थी। दोस्तों के साथ मेहंदी लगवाना, सेल्फी लेना, पर इस बार सावन फीका सा लग रहा। - आयुषी जिंदल, अस्सी
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कजरी की मल्हार बिन सुना लग रहा सावन
सावन पर कई सालों से हम लोग वृहद आयोजन करते थे। जिसमें सखियां कजरी गाती थीं। ढोलक और मंजीरे की तान पर हम सब मित्र करते थे इस बार न कजरी है और न समूह में सहेलियों संग बैठकर मेहंदी लगाने की खुशियां। इसलिए सावन सूना सा लग रहा है।- रश्मि अग्रवाल, मलदहिया
वर्चुअल सावन उत्सव में वह आनंद नहीं
बाग-बगीचे में घूमते सावन गीत व उस पर थिरकती सखियां। मगर इस साल यह उत्साह और उमंग वर्चुअल सावन महोत्सव में नहीं देखने को मिल रहा। संक्रमण के बढ़ते दायरे की वजह से सभी के मन में तनाव बढ़ रहा है। इस साल सावन बस औपचारिकता ही लग रही है।- श्रद्धा अग्रवाल, सुंदरपुर
याद आ रहा सखियों संग झूला झूलना
क्लब की ओर से भी कई तरह के कार्यक्रम में हम लोग सावन का खूब आनंद उठाते थे। रंग-बिरंगे परिधानों में सजधज कर हाथों में मेहंदी रचाना। नृत्य- संगीत के कार्यक्रमों की ढेर सारी मस्ती का वह रंग इस साल फीका सा लग रहा है।- रीता जायसवाल, पहड़िया