UP News: बनारस के इस विश्वविद्यालय परिसर में सुबह-शाम सैर के लिए देना होगा शुल्क, फैसले से लोगों में नाराजगी
पांच विश्वविद्यालय वाले शहर बनारस का एक विश्वविद्यालय अपने एक फैसले के कारण सुर्खियों में है। मामला है विश्वविद्यालय परिसर में सुबह-शाम की सैर पर शुल्क लगाने का। इस फैसले की चहुंओर आलोचना हो रही है। मामले की शिकायत पीएम और सीएम से की गई है।
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वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में शुल्क देकर ही योग और सुबह-शाम की सैर की जा सकेगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की गई है। जो लोग 750 रुपये खर्च करेंगे, वही परिसर में घुस पाएंगे। इसमें प्रतिमाह शुल्क 500 रुपये है। 250 रुपये में फोटोयुक्त पहचान पत्र बनेगा। हालांकि, इस आदेश का विरोध शुरू हो गया। सुबह-शाम की सैर करने वाले लोगों ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करने की बात कही है।
प्रदेश सरकार के स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने भी आदेश को अव्यवहारिक बताया। उन्होंने कहा कि खुले में सैर व हवा पर कोई शुल्क नहीं लगा सकता है। इस मामले में कुलपति से बात की जाएगी। विद्यापीठ परिसर में रोजाना करीब 400 लोग टहलते हैं।
कुलपति बोले- सुरक्षा के लिहाज से फैसला
कहा जा रहा कि काशी विद्यापीठ परिसर में योग व सैर करने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। इस पर नियंत्रण जरूरी है। शुल्क लगने से कम लोग आएंगे। जो लोग आएंगे, उनसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र की छाया प्रति ली जाएगी, फिर पहचान पत्र बनाकर दिया जाएगा। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.एके त्यागी ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में टहलने आने वालों की संख्या अधिक हो गई है। सुरक्षा के लिहाज से प्रतिमाह 500 रुपये शुल्क लगाया गया है। अब वही लोग परिसर में टहलेंगे, जिनको बहुत जरूरत होगी। अनावश्यक आने वालों पर अंकुश लगेगा। सभी को इसमें सहयोग करना चाहिए।
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योग को दिया जा रहा बढ़ावा मगर
सुबह की सैर व खुली हवा, लाख रुपये की दवा, इस कहावत को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ प्रशासन नहीं मानता है। इसी वजह से विश्वविद्यालय परिसर में जाकर योग, व्यायाम करने व टहलने वाले लोगों पर शुल्क थोप दिया गया। इसके पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन का तर्क भी अजीब है। केंद्र व राज्य सरकारें योग को बढ़ावा दे रही हैं। सुबह व शाम सैर करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। मुहिम को आगे बढ़ाने में सरकारी व गैर सरकारी संगठन भी लगे हैं। इसके बावजूद विद्यापीठ की कुलानुशासक ने परिसर में प्रवेश यानी योग व सुबह-शाम की सैर पर शुल्क लगा दिया।
अन्नपूर्णा कॉलोनी निवासी डॉ. अशोक राय ने कहा कि सरकार खेलकूद व टहलने के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। हाल ही में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स संपन्न हुए हैं। इसमें योग प्रतियोगिता कराई गई।हर दिन सुबह परिसर में टहलना होता है। कोई भीड़ नहीं लगती है।इस फैसले का विरोध होगा। मामले की शिकायत पीएम, राज्यपाल व सीएम से की जाएगी।
महमूरगंज निवासी अरविंद केशरी ने कहा कि सुबह और शाम टहलने के लिए तो डॉक्टर भी कहते हैं। इसके लिए शुल्क लगना ठीक नहीं है। पानी और शुद्ध हवा तो निशुल्क मिलनी ही चाहिए। टहलने जाने वालों से फीस वसूलने का फैसला अव्यवहारिक है। इसका हर स्तर पर विरोध होना चाहिए।
यहां तो कोई शुल्क नहीं
परिसर का माहौल मेले जैसा लगता है
काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय की कुलानुशासक प्रो. अमिता सिंह ने जो आदेश जारी किया है, उसके मुताबिक, परिसर में सुबह, शाम टहलने वालों की संख्या अधिक होती है। माहौल मेले जैसा लगता है। इससे छात्र-छात्राओं को दिक्कत होती है। पैदल निकलना मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा व्यवस्था भी प्रभावित होती है। कुलानुशासक कार्यालय में आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र की छायाप्रति, फोटो व 250 रुपये जमा कराके पहचान पत्र बनवाए जा सकते हैं।
वरिष्ठ नागरिकों को भी देने होंगे 250 रुपये
60 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले नागरिकों को प्रतिमाह शुल्क से राहत दी गई है, लेकिन उन्हें भी 250 रुपये जमा कराके प्रवेश पत्र बनवाने होंगे। इससे वरिष्ठ नागरिक हैरान हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त होने के बाद एक-एक रुपये का महत्व होता है। सुबह-शाम की सैर व योग के लिए शुल्क जमा कर पाना मुश्किल है। अब तो सब कुछ बंद करना पड़ेगा।
सिगरा स्टेडियम में हो रहा काम, नहीं है कोई जगह
संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम सिगरा में सबसे अधिक लोग सुबह और शाम टहलते थे, लेकिन इन दिनों स्टेडियम का कायाकल्प कराया जा रहा है। टहलने की कोई खास जगह नहीं है। इस कारण कैंट, मलदहिया, महमूरगंज, सिगरा और आसपास के इलाकों के लोग काशी विद्यापीठ परिसर में टहलने जाते हैं।