कोरोना काल: बेटी की डोली विदा करने से पहले पंचायत चुनाव ने ले ली बाबुल की जान
कोरोना काल में हुए पंचायत चुनाव ने वाराणसी में एक बेटी की शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। बेटी की शादी के लिए पिता ने जो सपने देखे थे, वो एक पल में बिखर गए। 27 अप्रैल को जो पिता बेटी का कन्यादान करने वाला था वो 24 अप्रैल को दुनिया छोड़ गया।
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जिस घर में खुशियों का माहौल था, बरात आने वाली थी, बेटी के हाथ पीले होने वाले थे। उस घर से पिता की अर्थी उठी। कोरोना काल में हुए पंचायत चुनाव ने एक बेटी की शादी की खुशियों को मातम में बदल दिया। बेटी की शादी के लिए पिता ने जो सपने देखे थे, वो एक पल में बिखर गए। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
27 अप्रैल को जो पिता बेटी का कन्यादान करने वाला था वो 24 अप्रैल को दुनिया छोड़ गया। माध्यमिक शिक्षा विभाग में उमरहा इंटर कॉलेज के प्राचार्य विजय कुमार सिंह की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी। 18 अप्रैल को ही विजय पोलिंग पार्टियों के साथ चिरईगांव ब्लाक के शंकरपुर गांव में बने मतदान केंद्र गए थे।
19 अप्रैल को मतदान के दौरान उन्हें बुखार हुआ और वह मतदान केंद्र पर ही बेहोश हो गए। बेटे विशाल ने बताया कि 19 अप्रैल को मतदान केंद्र से फोन आया कि पिताजी की तबीयत खराब हो गई है। इसके बाद मैंने अपने दोस्तों से बात की और मतदान केंद्र पर जाकर पिताजी को लेकर अस्पताल के लिए निकला। बेहोशी की हालत में हमने उन्हें बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया।
चिकित्सक ने उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। लेकिन अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हो पाया। दोस्तों के साथ मिलकर कई जगह वेंटिलेटर की व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। पिताजी का ऑक्सीजन लेवल लगातार गिरता जा रहा था, जिसकी वजह से 24 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई।
विजय कुमार सिंह के बेटे विशाल ने कहा कि मृतक आश्रित के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग में नौकरी के लिए आवेदन किया है। विभाग ने मेरे स्नातक योग्यता देखते हुए क्लर्क की नौकरी देने की बात कही है।