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वाराणसीः यूनिटेक के खिलाफ किसानों ने किया प्रदर्शन, टाउनशिप के लिए ली गई जमीन वापस करने की मांग
Fri, 27 Aug 2021 03:49 PM IST
वाराणसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 27 Aug 2021 03:49 PM IST
सार
योजना के तहत 1500 एकड़ जमीन लेना था जिसमें से 252.88 एकड़ जमीन यूनिटेक ने किसानों से क्रय कर लिया है। वर्षों बीतने के बाद जब इन जमीनों पर योजना आकार नहीं ली तो किसान आंदोलन करने लगे।
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नौ गांवों की जमीन लेकर टाउनशिप बसानी थी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूनिटेक के खिलाफ किसानों ने बृहस्पतिवार को किसानों ने कचहरी से विकास प्राधिकरण कार्यालय तक मार्च निकाला और प्रदर्शन करते हुए एसडीएम विनोद सिंह को ज्ञापन सौंपा। एडवोकेट दिनेश कुमार सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग थी कि यूनिटेक ने टाउनशिप बनाने के लिए किसानों की जो जमीन ली है उसे वापस किया जाए और राजस्व अभिलेखों में से यूनिटेक का नाम खारिज करके किसानों का नाम दर्ज किया जाए।
दरअसल, वर्ष 2005 की इस योजना के तहत नौ गांवों की जमीन लेकर टाउनशिप बसानी थी। योजना के तहत 1500 एकड़ जमीन लेना था जिसमें से 252.88 एकड़ जमीन यूनिटेक ने किसानों से क्रय कर लिया है। वर्षों बीतने के बाद जब इन जमीनों पर योजना आकार नहीं ली और यूनिटेक की ओर से कोई कार्य का प्रस्ताव वीडीए व शासन के समक्ष नहीं रखा गया तो किसान आंदोलन करने लगे।
मामला 2018 तक आते-आते इस कदर आ गया कि यूनिटेक डिफाल्टर घोषित हो गया और उसने खरीदी हुई जमीनों को नीलामी प्रक्रिया से बेचना चाहा। बाद में मामला कोर्ट पहुंचा उसके पहले ही 7 जून 2017 को वाराणसी विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष रहे पुलकित खरे ने योजना को रद्द करने की शासन से अनुशंसा कर दी। अब जो भी निर्णय लेना है वह शासन स्तर से लेना है।
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चूंकि जो योजना बनी थी उसमें यूनिटेक व वीडीए के बीच एमओयू हुआ था जिसमें प्लान पेश करने की सेवा व शर्तें थीं लेकिन प्रथम प्लान ही यूनिटेक की ओर से नहीं पेश किया गया जिससे सेवा व शर्तों का उल्लंघन हुआ और वीडीए ने इस योजना को रद्द करने की पहल की। उधर, वीडीए वीसी ईशा दुहन ने बताया कि योजना को रद्द करने की पहल पहले ही हो चुकी है। इस मामले में दोबारा शासन को रिमाइंडर भेजा जाएगा।
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दरअसल, वर्ष 2005 की इस योजना के तहत नौ गांवों की जमीन लेकर टाउनशिप बसानी थी। योजना के तहत 1500 एकड़ जमीन लेना था जिसमें से 252.88 एकड़ जमीन यूनिटेक ने किसानों से क्रय कर लिया है। वर्षों बीतने के बाद जब इन जमीनों पर योजना आकार नहीं ली और यूनिटेक की ओर से कोई कार्य का प्रस्ताव वीडीए व शासन के समक्ष नहीं रखा गया तो किसान आंदोलन करने लगे।
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मामला 2018 तक आते-आते इस कदर आ गया कि यूनिटेक डिफाल्टर घोषित हो गया और उसने खरीदी हुई जमीनों को नीलामी प्रक्रिया से बेचना चाहा। बाद में मामला कोर्ट पहुंचा उसके पहले ही 7 जून 2017 को वाराणसी विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष रहे पुलकित खरे ने योजना को रद्द करने की शासन से अनुशंसा कर दी। अब जो भी निर्णय लेना है वह शासन स्तर से लेना है।
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चूंकि जो योजना बनी थी उसमें यूनिटेक व वीडीए के बीच एमओयू हुआ था जिसमें प्लान पेश करने की सेवा व शर्तें थीं लेकिन प्रथम प्लान ही यूनिटेक की ओर से नहीं पेश किया गया जिससे सेवा व शर्तों का उल्लंघन हुआ और वीडीए ने इस योजना को रद्द करने की पहल की। उधर, वीडीए वीसी ईशा दुहन ने बताया कि योजना को रद्द करने की पहल पहले ही हो चुकी है। इस मामले में दोबारा शासन को रिमाइंडर भेजा जाएगा।