सेना में भर्ती का झांसा देकर रुपये ऐंठने वाला फर्जी कैप्टन गिरफ्तार, एसटीएफ ने पकड़ा
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खुद को आर्मी का कैप्टन और यूपी पुलिस का डीएसपी बताकर सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगने के आरोपी वाराणसी के शिवपुर कोट निवासी राजवीर सिंह रघुवंशी उर्फ आनंद कुमार को मंगलवार को छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। कार्रवाई मिलिट्री इंटेलिजेंस के इनपुट पर एसटीएफ की वाराणसी इकाई ने की है।
आरोपी के पास से दो मोबाइल, आर्मी भर्ती के तीन फर्जी एडमिट कार्ड, एक फर्जी डीएल, एक सेट आर्मी कैप्टन की वर्दी, एक बाइक, आधार कार्ड, कैप्टन की वर्दी में फोटो, फर्जी तरीके से डिप्टी एसपी के पद पर चयन की पेपर कटिंग, एक सेट आर्मी की सामान्य वर्दी, पांच मुहर, आर्मी के लोगों लगे तीन कागज, पांच हजार रुपये और एक बाइक बरामद हुई है।
मिलिट्री इंटेलिजेंस को इनपुट मिला था कि वाराणसी और इसके आसपास के जिलों में सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगने का एक गिरोह सक्रिय है। इस इनपुट के आधार पर एसटीएफ की फील्ड इकाई सक्रिय हुई।
एसटीएफ की वाराणसी इकाई के डिप्टी एसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि अभिसूचना संकलन के दौरान पता लगा कि राजवीर उर्फ आनंद खुद को आर्मी का फर्जी कैप्टन बताकर सेना में भर्ती कराने के नाम पर और कैंटीन से सामान निकलवाने के नाम पर लोगों को ठगता है।
इसके साथ ही वह ओएलएक्स वेबसाइट पर खुद की फोटो सेना की वर्दी में पोस्ट करके भी लोगों को सामान बेंचने के बहाने ठगता है। मंगलवार की दोपहर में पता लगा कि सेना में भर्ती के नाम पर राजवीर ने छावनी क्षेत्र में स्थित एक स्कूल के समीप तीन युवकों को बुलाया है। इस सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर अनिल सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ की टीम ने घेरेबंदी कर राजवीर को पकड़ लिया। आगे की विधिक कार्रवाई के लिए उसे कैंट थाने की पुलिस को सौंपा गया है।
सेना भर्ती में हुआ था असफल, अब तक 40 लाख से ज्यादा ठगा
पूछताछ में राजवीर ने बताया कि वह एलएलबी तृतीय सेमेस्टर का छात्र है। उसने वर्ष 2008 में सेना भर्ती के लिए परीक्षा दी थी लेकिन सफल नहीं हुआ था। इसके बाद वह बेरोजगार युवकों को सेना में भर्ती कराने के नाम पर ठगने लगा। योजना के मुताबिक उसने आर्मी कैप्टन की वर्दी बनवाई और अपने क्षेत्र के लोगों को विश्वास दिलाया कि वह आर्मी में कैप्टन हो गया है।
वर्ष 2017 में लोहता के भिटारी निवासी अमरनाथ यादव से उसकी मुलाकात हुई तो खुद को कैप्टन बताते हुए उसे आर्मी में भर्ती कराने को कहा। इसके बाद अमरनाथ के घर पर ही कुछ अन्य अभ्यर्थियों को विश्वास दिलाने के लिए आर्मी कैप्टन की वर्दी पहन कर वह गया। साथ ही सेना में भर्ती के नाम पर सात लोगों से 14 लाख रुपये लिए।
इसके अतिरिक्त उसने सुधाकर वर्मा, रजनीश और दिव्या से 10 लाख रुपये सेना में भर्ती के नाम पर लिए। अजय कुमार से डेढ़ लाख रुपये मिलिट्री कैंटीन से सामान निकालने के नाम पर ठगे। इसी तरह से कई अन्य लोगों को भी ठगा, जो उसे अब याद नहीं हैं।
वर्ष 2020 में राजवीर की पत्नी और आसपास के लोगों को उसके फर्जी आर्मी कैप्टन होने का संदेह होने लगा। वर्ष 2020 में ही पीसीएस-2017 का परिणाम आया, जिसमें लंका निवासी आनंद कुमार का 62वां स्थान था और उनका चयन डिप्टी एसपी के पद पर हुआ था।
राजवीर उर्फ आनंद ने अपना नाम आनंद का फायदा उठाकर एक समाचार पत्र में अपने बारे में समाचार छपवाया कि उसका चयन डिप्टी एसपी के पद पर हुआ है। इसके बाद वह आर्मी कैप्टन और डिप्टी एसपी दोनों के तौर पर लोगों को ठगने लगा।
शादी में भी फर्जीवाड़ा किया, पत्नी ने दर्ज कराया था मुकदमा
राजवीर उर्फ आनंद ने बताया कि वर्ष 2016 में उसने ओएलएक्स वेबसाइट पर आर्मी का लोगों लगाकर अपनी आईडी बनाई थी। इसके बाद एक ब्रांडेड कंपनी के मोबाइल को बेचने के लिए उसने ओएलएक्स पर विज्ञापन पोस्ट किया था। उस मोबाइल को खरीदने के लिए एक लड़की ने अनुरोध किया। इस पर राजवीर सिंह उर्फ आनंद ने उसको सिगरा बुलाया और वहां आर्मी कैप्टन की वर्दी में उससे मिला।
राजवीर ने उसे अपनी नियुक्ति 39 जीटीसी छावनी क्षेत्र बताई और खुद को हैदराबाद का मूल निवासी बताया। इसके बाद दोनों में जान-पहचान बढ़ी तो बाद में राजवीर उर्फ आनंद ने उसको असलियत न बताकर उससे शादी कर ली थी। धोखाधड़ी उजागर होने पर उसकी पत्नी उसके खिलाफ लोहता थाने में बीती चार फरवरी को मुकदमा दर्ज कराई थी।