यूपी: यहां लगता है गधों और खच्चरों का मेला, करोड़ों में खरीदने के लिए आते हैं विदेशों से खरीदार
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आपने हमेशा गधों के बारे में अक्सर यही सुना होगा कि ये किसी काम के नहीं होते हैं। ये तो गधे हैं। हम गधा शब्द को उस जगह पर प्रयोग करते हैं, जहां वो वस्तु किसी काम की न हो। लेकिन आपको बता दें कि गधे भी बहुत काम के होते हैं। ये आपको वहां देखने को मिलेगा, जहां इनकी कीमत लाखों और करोड़ों में लगती है। और ये उत्तर प्रदेश का एक जिला है।
ये पूर्वांचल का बलिया जिला है, जहां गधों और खच्चर का मेला लगता है। इसमें इनकी करोड़ों की कीमत लगती है। जिले में बिल्थरारोड के सोनाडीह में इन दिनों में मेला लगा हुआ है। इसे देश का सबसे बड़ा मेला भी कहते हैं। यहां बिहार, नेपाल, लखनऊ, मऊ, गोरखपुर, देवरिया और आजमगढ़ के खरीदार आते हैं।
ये मेला पितृपक्ष में तीन दिनों तक लगता है। और आपको बता दें कि मेले का संचालन शासन-प्रशान की ओर से नहीं होता है और न ही यहां पर सुरक्षा-व्यवस्था प्रशासन के हाथ में होती है। इसके साथ ही व्यापारियों के रहने के लिए रहने की व्यवस्था होती है।
यह मेला शनिवार से शुरू हो गया। इन दिनों व्यापारी करीब एक हजार की संख्या में गधा और खच्चर लेकर, बेचने के लिए पहुंच गए हैं। अन्य व्यापारियों के आने का क्रम अभी तक जारी है।
मेले में हर साल नेपाल और लखनऊ से बड़े कारोबारी भी आते है, जो खच्चर का छोटा बच्चा लेकर आते हैं और इसकी बिक्री कर बड़ा खच्चर खरीदकर ले जाते है। मेले में एक गधे-खच्चर की कीमत उसके साइज और क्वालिटी के हिसाब से 30 हजार से एक लाख तक होती है। मेले में यहां खरीदारों और बेचने वालों से स्थानीय स्तर पर सुविधा शुल्क की वसूली भी खूब होती है। इसे लेकर अक्सर किचकिच भी होती है।
जिले में वैसे देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला ददरी भी इसी जिले में आयोजित होता है। मगर गधों और खच्चरों के लिए अतिरिक्त मेला यह पितृपक्ष के दौरान आयोजित होता है। मेले से जुडे़ लोग बताते हैं कि देश में यह अपनी तरह का एकमात्र पशु मेला है जहां सिर्फ गधे और खच्चरों का कारोबार होता है।
1985 से लगता है सोनाडीह मेला
सोनाडीह मेले में आज से तीन दशक पूर्व 1985 में क्षेत्र के पड़री ग्राम निवासी धोबी समाज के लोगों ने मेले की शुरुआत की थी। तब से लेकर हर साल पितृपक्ष के दौरान मेला लगता चला आ रहा है। मेले की शुरुआत करने वालों में पड़री निवासी गरीब धोबी, सोनाडीह निवासी बुड़ावन धोबी, मऊ के रामपुर निवासी रघुनाथ, गाजीपुर के गौसपुर निवासी बरसाती धोबी आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।