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मारवाड़ी अस्पताल मामलाः दोबारा आपरेशन के बाद लौटी मरीजों के आंखों की रोशनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 18 Jun 2018 10:30 AM IST
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आरके नेत्रालय में ऑपरेशन के बाद बैठे लोग
- फोटो : अमर उजाला
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बनारस में मारवाड़ी अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद आंखों की रोशनी गंवाने वाले लोगों के लिए रविवार का दिन खुशखबरी लेकर आया। आंख के आपरेशन के बाद जिन मरीजों की रोशनी चली गई थी, उनका दोबारा आपरेशन के बाद रोशनी लौट आई।
आरके नेत्रालय में शनिवार की शाम पांच मरीजों का आपरेशन किया गया था। रविवार दोपहर में जब सभी के आंखों की पट्टी खोली गई उन्हें दिखाई पड़ने लगा।
गौदौलिया स्थित मारवाड़ी अस्पताल में 12 जून को एक साथ छह मरीजों का मोतियाबिंद का आपरेशन हुआ था। अगले दिन जब आंख से पट्टी हटी तो उन्हें दिखाई नहीं दिया। इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की गई तो उन्होंने जल्द ही ठीक हो जाने का आश्वासन दिया लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
इसके बाद मरीज इधर-उधर चक्कर काटते रहे। इसी बीच 15 जून को परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो जिला प्रशासन के दबाव पर मरीजों को महमूरगंज स्थित आरके नेत्रालय लाकर भर्ती कराया गया।
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शनिवार शाम छह मरीजों बक्सर के यज्ञ नारायण चौबे, मिर्जामुराद की पार्वती देवी, जौनपुर की वंदना देवी, चंदौली के त्रिवेणी वर्मा, वाराणसी के नवाबगंज की अख्तरी बेगम और कोनिया की मालती देवी की जांच के बाद वंदना को छोड़ बाकी का दोबारा आपरेशन किया गया।
आरके नेत्रालय के निदेशक और नेत्र सर्जन डॉ. आरके ओझा ने रविवार को सुबह करीब 11 बजे जब उनकी आंख की पट्टी हटाई तो मरीजों को दिख रहा था। इधर निदेशक ने इसकी जानकारी सीएमओ को भी दी। बताया कि अभी मरीजों को दो-तीन दिन यहां रखना पड़ेगा, इसके बाद जांच कराकर छोड़ा जाएगा।
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आरके नेत्रालय में शनिवार की शाम पांच मरीजों का आपरेशन किया गया था। रविवार दोपहर में जब सभी के आंखों की पट्टी खोली गई उन्हें दिखाई पड़ने लगा।
गौदौलिया स्थित मारवाड़ी अस्पताल में 12 जून को एक साथ छह मरीजों का मोतियाबिंद का आपरेशन हुआ था। अगले दिन जब आंख से पट्टी हटी तो उन्हें दिखाई नहीं दिया। इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से की गई तो उन्होंने जल्द ही ठीक हो जाने का आश्वासन दिया लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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इसके बाद मरीज इधर-उधर चक्कर काटते रहे। इसी बीच 15 जून को परिजनों ने हंगामा शुरू किया तो जिला प्रशासन के दबाव पर मरीजों को महमूरगंज स्थित आरके नेत्रालय लाकर भर्ती कराया गया।
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शनिवार शाम छह मरीजों बक्सर के यज्ञ नारायण चौबे, मिर्जामुराद की पार्वती देवी, जौनपुर की वंदना देवी, चंदौली के त्रिवेणी वर्मा, वाराणसी के नवाबगंज की अख्तरी बेगम और कोनिया की मालती देवी की जांच के बाद वंदना को छोड़ बाकी का दोबारा आपरेशन किया गया।
आरके नेत्रालय के निदेशक और नेत्र सर्जन डॉ. आरके ओझा ने रविवार को सुबह करीब 11 बजे जब उनकी आंख की पट्टी हटाई तो मरीजों को दिख रहा था। इधर निदेशक ने इसकी जानकारी सीएमओ को भी दी। बताया कि अभी मरीजों को दो-तीन दिन यहां रखना पड़ेगा, इसके बाद जांच कराकर छोड़ा जाएगा।
चौबीस घंटे की देरी होती तो निकालनी पड़ती आंख
इनका हुआ था मारवाड़ी अस्पताल में हुआ था ऑपरेशन
- फोटो : File Photo
मारवाड़ी अस्पताल में जिन लोगों की आंखों की रोशनी चली गई है, उनको अगर 24 घंटे की देरी और होती तो उनकी आंख ही निकालनी पड़ती। परिजनों ने समय से जानकारी दे दी और दूसरे अस्पताल में ऑपरेशन करा दिया गया नहीं तो दूसरी आंख खराब होने के साथ-साथ ही दिमाग पर भी असर पड़ता।
दोबारा ऑपरेशन करने वाले आरके नेत्रालय के निदेशक और नेत्र सर्जन डॉ. आरके ओझा ने बताया कि अगर एक दिन और देर होती तो शायद उनकी आंख निकालनी पड़ती। पांच पीड़ितों की आंख से मवाद निकालने के बाद संक्रमण कम हो गया है।
अस्पताल में 12 जून को छह लोगों की आंख का आपरेशन हुआ। दो दिन बाद यह पता चलने पर कि आंख की रोशनी वापस नहीं होगी, परिजनों के होश उड़ गए। अस्पताल प्रशासन शुरुआत में इस मामले को दबाने के साथ ही आश्वासन देता रहा कि रोशनी आ जाएगी।
शुक्रवार को परिजनों के हंगामा करने पर मामले का खुलासा हुआ। पीड़ितों के परिजन अभी भी दहशत में हैं। उन्होंने कहा कि वे मारवाड़ी अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने के लिए किसी को सलाह भी नहीं देंगे।
दोबारा ऑपरेशन करने वाले आरके नेत्रालय के निदेशक और नेत्र सर्जन डॉ. आरके ओझा ने बताया कि अगर एक दिन और देर होती तो शायद उनकी आंख निकालनी पड़ती। पांच पीड़ितों की आंख से मवाद निकालने के बाद संक्रमण कम हो गया है।
अस्पताल में 12 जून को छह लोगों की आंख का आपरेशन हुआ। दो दिन बाद यह पता चलने पर कि आंख की रोशनी वापस नहीं होगी, परिजनों के होश उड़ गए। अस्पताल प्रशासन शुरुआत में इस मामले को दबाने के साथ ही आश्वासन देता रहा कि रोशनी आ जाएगी।
शुक्रवार को परिजनों के हंगामा करने पर मामले का खुलासा हुआ। पीड़ितों के परिजन अभी भी दहशत में हैं। उन्होंने कहा कि वे मारवाड़ी अस्पताल में आंख का ऑपरेशन कराने के लिए किसी को सलाह भी नहीं देंगे।
आरोपी डॉक्टर की ओपीडी पर रोक
marwadi hospital
- फोटो : अमर उजाला
छह लोगों की रोशनी जाने के मामले में मारवाड़ी अस्पताल प्रबंधन ने मोतियाबिंद का ऑपरेशन करने वाले डॉ. सनी गुप्ता की ओपीडी पर रोक लगा दी है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
इस बीच मामला सामने आने के बाद शनिवार को आम दिनों की अपेक्षा ओपीडी में मरीजों की संख्या नाममात्र की रही। नेत्र रोग विभाग में भी सन्नाटा रहा।
अस्पताल प्रबंधन के रवि अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल हमारी पहली प्राथमिकता है कि पीड़ितों की आंखों की रोशनी किसी भी तरह वापस आ जाए। इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। मरीजों का ऑपरेशन दोबारा कराया गया है और उसका परिणाम भी सकारात्मक है।
इस बीच मामला सामने आने के बाद शनिवार को आम दिनों की अपेक्षा ओपीडी में मरीजों की संख्या नाममात्र की रही। नेत्र रोग विभाग में भी सन्नाटा रहा।
अस्पताल प्रबंधन के रवि अग्रवाल ने बताया कि फिलहाल हमारी पहली प्राथमिकता है कि पीड़ितों की आंखों की रोशनी किसी भी तरह वापस आ जाए। इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं। मरीजों का ऑपरेशन दोबारा कराया गया है और उसका परिणाम भी सकारात्मक है।