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Varanasi News: यूपीआईटीएस मेले से काशी के उत्पादों का विदेश में निर्यात 10-15% बढ़ेगा, ऑर्डर का रास्ता साफ
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वाराणसी। नोएडा में आयोजित यूपीआईटीएस में काशी के पारंपरिक हस्तशिल्प और विशिष्ट उत्पादों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत धाक जमाई है। तीन दिवसीय इस व्यापार मेले में यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, अमेरिका और खाड़ी देशों के खरीदारों ने बनारसी सिल्क साड़ी, गुलाबी मीनाकारी, लकड़ी के खिलौने, सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क और ऑर्गेनिक उत्पादों में दिलचस्पी दिखाई है।
मेले में वाराणसी से पहुंचे 45 उद्यमियों और निर्यातकों के स्टॉलों पर विदेशी खरीदारों की लगातार आवाजाही बनी रही, जिससे आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष निर्यात ऑर्डर मिलने का रास्ता साफ हुआ है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के यूपी हेड आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि यूपीआईटीएस मेले के बाद काशी के उत्पादों का विदेश में 10-15 फीसदी निर्यात बढ़ेगा।
डीजीएफटी के आंकड़ों के मुताबिक, देश का कुल हैंडीक्राफ्ट निर्यात 3.5 अरब डॉलर से अधिक का रहा है। इसमें वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी, मेटल क्राफ्ट और सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का निर्यात सालाना 12 से 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है। लकड़ी के खिलौनों के निर्यात में पिछले तीन वर्षों में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, अब इसके खरीदार अन्य देशों में भी बढ़ेंगे। यूपीआईटीएस में हिस्सा लेने वाली अदिति सिंह सोलंकी व गुलाबी मीनाकारी के आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह का कहना है कि स्पेन और ऑस्ट्रेलिया के खरीदारों ने हैंडमेड सिल्क और गुलाबी मीनाकारी के जटिल डिजाइन की सराहना करते हुए कस्टमाइज्ड सैंपल मांगे हैं। जर्मनी और यूके के प्रतिनिधियों ने काशी के प्रमाणित ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों और वेलनेस आइटम्स के लिए थोक आपूर्ति समझौतों में रुचि दिखाई है।
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वर्जन
वाराणसी जिले को जीआई और पारंपरिक क्लस्टरों के केंद्र के रूप में चिह्नित किया गया है। स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों को सीधे ई-कॉमर्स व विदेशी खरीदारों से जोड़ने के लिए लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। - अभिषेक प्रियदर्शी, उपायुक्त उद्योग
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मेले में वाराणसी से पहुंचे 45 उद्यमियों और निर्यातकों के स्टॉलों पर विदेशी खरीदारों की लगातार आवाजाही बनी रही, जिससे आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष निर्यात ऑर्डर मिलने का रास्ता साफ हुआ है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (फियो) के यूपी हेड आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि यूपीआईटीएस मेले के बाद काशी के उत्पादों का विदेश में 10-15 फीसदी निर्यात बढ़ेगा।
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डीजीएफटी के आंकड़ों के मुताबिक, देश का कुल हैंडीक्राफ्ट निर्यात 3.5 अरब डॉलर से अधिक का रहा है। इसमें वाराणसी की गुलाबी मीनाकारी, मेटल क्राफ्ट और सॉफ्ट स्टोन जाली वर्क का निर्यात सालाना 12 से 15 प्रतिशत की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है। लकड़ी के खिलौनों के निर्यात में पिछले तीन वर्षों में लगभग 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, अब इसके खरीदार अन्य देशों में भी बढ़ेंगे। यूपीआईटीएस में हिस्सा लेने वाली अदिति सिंह सोलंकी व गुलाबी मीनाकारी के आर्टिजन कुंज बिहारी सिंह का कहना है कि स्पेन और ऑस्ट्रेलिया के खरीदारों ने हैंडमेड सिल्क और गुलाबी मीनाकारी के जटिल डिजाइन की सराहना करते हुए कस्टमाइज्ड सैंपल मांगे हैं। जर्मनी और यूके के प्रतिनिधियों ने काशी के प्रमाणित ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों और वेलनेस आइटम्स के लिए थोक आपूर्ति समझौतों में रुचि दिखाई है।
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वाराणसी जिले को जीआई और पारंपरिक क्लस्टरों के केंद्र के रूप में चिह्नित किया गया है। स्थानीय बुनकरों और शिल्पकारों को सीधे ई-कॉमर्स व विदेशी खरीदारों से जोड़ने के लिए लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और निर्यात प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया गया है। - अभिषेक प्रियदर्शी, उपायुक्त उद्योग