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गंगा में लाशों को बहाना गलत, घाटों पर नमामि गंगे ने बढ़ाई सतर्कता

Wed, 12 May 2021 01:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 12 May 2021 01:19 AM IST
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Excuse of corpses in Ganga wrong, Namami Gange increases vigilance on ghats
वाराणसी। गंगा नदी में गाजीपुर और बक्सर में शव मिलने के बाद काशी के गंगा घाटों और तटवर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। वहीं नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने भी लोगों से गंगा से कुछ दिनों तक दूरी बढ़ाने की अपील की है।
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गंगा में शव मिलने की घटना को नमामि गंगे ने भी गंभीरता से लिया है। इसके लिए बनारस सहित संपूर्ण गंगा बेसिन में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि गाजीपुर और बक्सर में गंगा नदी में शव मिले हैं। कुछ लोगों ने यह कहा कि बनारस से शव गंगा में बहाए गए हैं लेकिन यह निराधार है। वाराणसी से गाजीपुर तक गंगा के बीच की दूरी 120 और बक्सर की 250 किलोमीटर के लगभग है। वाराणसी में गंगा में बहुत से टर्निंग प्वाइंट हैं अगर कोई भी शव गंगा में बहाया जाएगा तो वह किनारे लग जाएगा। ऐसे में गंगा से लाशों का इतनी दूर तक बहकर जाना असंभव है। कोरोना महामारी का काल है ऐसे में आशंका है कि जो भी शव गंगा में बहाए गए हैं कोरोना संक्रमित होंगे। पानी में कोरोना संक्रमितों का शव बहाने से कोरोना का फैलाव काफी तेजी से होगा। ऐसी स्थिति में लोगों से अपील है कि जिस इलाके में शव मिले हैं वहां के लोग गंगास्नान और गंगाजल का इस्तेमाल करना बंद कर दें। इससे कोरोना संक्रमण का खतरा हो सकता है। वहीं मृतकों के शव को गंगा में ना बहाएं। गंगा में फेंकने से उनको मुक्ति मिलेगी या नहीं लेकिन कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलेगा।
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स्थानीय जिला प्रशासन से भी अपील है कि अगर उनको कोई भी शव गंगा में बहता हुआ मिले तो उसको निकालकर जलाने का इंतजाम कराएं, जिससे कि किसी भी तरह के संक्रमण से बचाव हो सके। गंगाजल से कोरोन वायरस के खात्मे के वैज्ञानिक अध्ययन की रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। ऐसे हालात में आम जनता को बेहद सतर्कता व सावधानी बरतनी होगी।
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गंगा में लाशों का बहाया जाना निंदनीय
वाराणसी। गंगा में लाशों के बहाए जाने की घटनाओं पर पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने दु:ख जताया है। पूर्व सांसद ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में बेहिसाब लाशों को मां गंगा में फेंका और बहाया जा रहा है, जो दु:खद और निंदनीय है।

कोरोना महामारी से निपटने में केंद्र और प्रदेश सरकार दोनों ही नाकाम हो चुकी है। काशी सहित पूरा देश त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है। सरकार के हिसाब से सब सही है लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है, सही आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि श्मशान कब्रिस्तान छोड़िए लाशों को बहा दिया जा रहा है। कहा कि पद्मभूषण पंडित राजन मिश्रा के नाम पर अस्थायी अस्पताल बनाने के बजाय सरकार को स्थायी अस्पताल बनाना चाहिए ताकि उनको सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।
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