Varanasi News: रेलवे की संपत्ति चुराने वाले गैंग का सरगना निकला भूतपूर्व सैनिक, आरपीएफ ने किया खुलासा
रेलवे सुरक्षा बल (वाराणसी मंडल) ने रेलवे की संपत्ति चुराने वाले गैंग का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्त में आया गैंग का सरगना बलिया जिले का भूतपूर्व सैनिक है।
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वाराणसी मंडल के आरपीएफ की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच (सीआईबी) की टीम ने शुक्रवार को रेल संपत्ति की चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। सीआईबी के मुताबिक गिरोह अब तक सवा करोड़ मूल्य की रेल पटरी और तार की चोरी कर दूसरे राज्यों में बेच चुका है।
गिरफ्तार बलिया निवासी आरोपी रेलवे से चोरी का माल पटना में कई कारखानों से सांठगांठ कर बेचता था। मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त आरपीएफ पूर्वोत्तर रेलवे डॉ. अभिषेक कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह सीआईबी की टीम ने मुखबिर से मिली जानकारी पर कार्रवाई करते हुए मुख्य सरगना सेना से रिटायर रणविजय सिंह को बलिया के सिकंदरपुर से गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी की तलाश में पुलिस को कई राज्यों और शहर शहर उसका पीछा करना पड़ा। आरोपी शुक्रवार की सुबह नोएडा से भागकर बलिया आया था। मंडल सुरक्षा आयुक्त ने बताया कि 27 मार्च को आरपीएफ ने कादिपुर स्टेशन से हाइड्रा और डीसीएम चालक जौनपुर निवासी संजय प्रजापति, अजमगढ़ निवासी राकेश यादव को रेलवे संपत्ति ले जाते गिरफ्तार कर लिया।
सात अप्रैल को हुई दूसरी गिरफ्तारी
27 मार्च के बाद सूत्र खंगालने और आरोपी की निशानदेही पर सीआईबी ने सात अप्रैल को मकबूल आलम रोड़ से निजाम अशरफ को गिरफ्तार किया, लेकिन मुख्य आरोपी पकड़ से दूर था। जांच अधिकारी अभय कुमार राय ने बताया कि अभियुक्त बेहद शातिर था। वह फर्जी पते पर सिम लेता था। कभी भी स्वयं सामने नहीं आता। फोन से वाहन चालक से संपर्क करता सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजता था। स्टेशन यार्ड से विक्रय स्थल पर माल पहुंचने के बाद विक्रय का पैसा लेकर चला जता था।
सीआईबी के हत्थे चढ़ा मुख्य आरोपी 2018 में सेना से रिटायर है। जांच अधिकारी अभय कुमार राय के मुताबिक आरोपी आर्मी से सेवानिवृत्त होने के बाद रणविजय सिंह नोएडा में रहता था। कभी कभार ही वह गांव आता था। जिसके चलते गांव वाले उसके इस कृत्य से अंजान थे।
सिम दर सिम की पड़ताल से पकड़ में आया सरगना
अपराध करने के लिए फर्जी पहचान पर सिम लेता था। किसी अन्य व्यक्ति के आधार कार्ड से सिम लेने के चलते वह वह जांच दल से पकड़ से दूर रहा था। जांच अधिकारी के मुताबिक पुलिस ने मिले सात सिम और सीडीआर पड़ताल करने के बाद एक पुख्ता क्लू हासिल किया। सिम के आधार पर नोएडा में भी छापा मारा गया, लेकिन आरोपी पकड़ से दूर था।
बलिया में मुखबिर की पुख्ता जानकारी पर वह पकड़ में आया। फर्जी सिम के माध्यम से बात कर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर खुले में पड़े रेल लाइन और बिजली के सरकारी सामान को चोरी कर पटना में बेचता था। अपराध को अंजाम देने के बाद सिम और मोबाइल को नष्ट कर देता था।