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आज भी सादगी की मिसाल कहे जाते हैं शास्त्री जी
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काशी के लाल और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री आज भी सादगी की मिसाल हैं। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले शास्त्री जी ने प्रधानमंत्री के पद पर मात्र 18 माह के कार्यकाल में ही नैतिक राजनीति को स्थापित किया। संघर्षों से भरा उनका जीवन और उनकी रहस्यमय मृत्यु का राज आज तक भारतवासियों को झकझोरता है। रामनगर में स्थित शास्त्री जी का आवास काशी के लाल की सादगी और सार्वजनिक जीवन की कहानी कहता है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ सुभाष यादव ने बताया कि रामनगर स्थित पूर्व प्रधानमंत्री के आवास पर आने जाने वालों को लाल बहादुर शास्त्री का अक्स आंखों के सामने जरूर नजर आता है। रामनगर स्थित शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय के म्यूजियम में सबसे पहले प्रवेश करते ही उनसे जुड़ी तमाम यादों की फोटो गैलरी सजी हुई हैं। शास्त्री जी ने रामनगर से अपने जीवन की शुरुआत की। तमाम कठिनाईयों से जूझते हुए देश के प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया। राजनीति में उनके द्वारा लिए गए साहसिक निर्णय आज भी लोगों के लिए मिसाल है। चाहे रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री पद से इस्तीफा हो या 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उनका नेतृत्व या फि र उनका दिया जय जवान जय किसान का नारा। ताशकंद में 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच समझौते पर दस्तखत किए और उसके अगले ही दिन यानी 11 जनवरी 1966 को उनका निधन हो गया।
रेलवे कॉलोनी में हुआ था जन्म
मुगलसराय की रेलवे कालोनी में शारदा प्रसाद तथा रामदुलारी देवी के घर में दो अक्तूबर 1904 में लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। शास्त्री जी की दो बहनें कैलाशी देवी व सुंदरी देवी थीं।
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क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ सुभाष यादव ने बताया कि रामनगर स्थित पूर्व प्रधानमंत्री के आवास पर आने जाने वालों को लाल बहादुर शास्त्री का अक्स आंखों के सामने जरूर नजर आता है। रामनगर स्थित शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय के म्यूजियम में सबसे पहले प्रवेश करते ही उनसे जुड़ी तमाम यादों की फोटो गैलरी सजी हुई हैं। शास्त्री जी ने रामनगर से अपने जीवन की शुरुआत की। तमाम कठिनाईयों से जूझते हुए देश के प्रधानमंत्री तक का सफर तय किया। राजनीति में उनके द्वारा लिए गए साहसिक निर्णय आज भी लोगों के लिए मिसाल है। चाहे रेल दुर्घटना के बाद रेल मंत्री पद से इस्तीफा हो या 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में उनका नेतृत्व या फि र उनका दिया जय जवान जय किसान का नारा। ताशकंद में 10 जनवरी 1966 को भारत और पाकिस्तान के बीच समझौते पर दस्तखत किए और उसके अगले ही दिन यानी 11 जनवरी 1966 को उनका निधन हो गया।
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रेलवे कॉलोनी में हुआ था जन्म
मुगलसराय की रेलवे कालोनी में शारदा प्रसाद तथा रामदुलारी देवी के घर में दो अक्तूबर 1904 में लाल बहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। शास्त्री जी की दो बहनें कैलाशी देवी व सुंदरी देवी थीं।
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